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Please sign the petition to Demand Scrap the anti people land acquisition ordinance

Please sign the petition to Demand Scrap the anti people land acquisition ordinance

this is online petition addressed to Prime minister to India

to Demand Scrap the anti people land acquisition ordinance

 

http://www.change.org/p/prime-minister-of-india-an-appeal-to-scrap-anti-people-land-acquisiton-ordinance?recruiter=90787932&utm_source=share_petition&utm_medium=copylink

युवा भारत के ७ वे अखिल भारतीय संमेलन,प.बंगाल द्वारा पारित प्रस्ताव

 1) भूमी अधिग्रहण अध्यादेश पर प्रस्ताव

युवा भारत संघठन २००५ से जमीन हथियाने कि नीतियो के विरोध में लगातार संघर्ष करते आया है  |जनविरोधी सेझ कानून २००५ के खिलाफ युवा भारत ने महामुंबई शेतकरी (किसान) समिती बनाकर रायगढ (महाराष्ट्र) में निर्णायक लढाई खडी की.पोस्को(उडीसा)सिंगूर,नंदीग्राम,उलुबेरिया (प.बंगाल) में जमीन हथियाने कि साम्राज्यवादी नितीयो के खिलाफ संघर्ष खडा किया | सेझ के माध्यम से जल,जंगल,जमीन हथियाने कि इस प्रक्रिया में इन संघर्शो के परिणामस्वरूप २०१३ में ब्रिटीश हुकमत के जमीन अधिग्रहण कानून १८९४ में व्यापक संशोधन कर जमीन अधिग्रहण के लिए आवश्यक सार्वजनिक हित के प्रावधान को हटा दिया गया | हर प्रकार के निजी एवं सार्वजनिक परीयोजनाओ के लिए जमीन हथियाने को मान्यता देकर केवल मुआवजे व पुनर्वास के दायरे में चर्चा को सिमटा कर रख दिया | २०१३ में बनाये गए इसी उचित मुआवजा का अधिकार,पुनर्स्थापना,पुनर्वास एवं पारदर्शिता भूमी अधिग्रहण विधेयक  २०१३ में  हाल कि  सरकार ने और भी संशोधन एक अध्यादेश द्वारा किये है |

    अध्यादेश में कहा गया है कि पांच उद्देशो-सुरक्षा,रक्षा,ग्रामीण आधारभूत सरंचना,औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी सामाजिक के निर्माण के लिए अनिवार्य सहमती कि उपधारा और सामाजिक प्रभाव आकलन कि शर्त भूमी अधिग्रहण के लिए आवश्यक नही होगी | अध्यादेश के मुताबिक बहुफसली सिंचीत भूमी भी इन उद्देशो के अधिग्रहित कि जा सकती है |भूमी अधिग्रहण कानून २०१३ देश के अनेक जनसंघठनो द्वारा लढे गये संघर्ष और सर्वोच न्यायालय के कई फैसलो के दबाव कि तार्किक परिणीती था | इस तार्किक परिणीती को महज एक अध्यादेश द्वारा पलट दिया गया है | इस अध्यादेश के तीन आयाम है-एक तो यह की इसमे जमीन मालीको कि सहमती कि शर्त को काफी हद तक काम कर दिया है |दुसरा,ऐसी परियोजनाओ का दायरा काफी हद तक बाधा दिया है,जिसके लिए अधिग्रहण करणे के लिए सहमती कि आवश्यकता हि नही होगी | तीसरा अब बहुफसली जमीन का भी अधिग्रहण किया जा सकेगा| इस अध्यादेश से अत्याधिक अधिग्रहण और जबरन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है |

सरकार का यह फैसला पुंजीपतीयो के पक्ष में और किसान एवं गरीबो के खिलाफ तथा अलोकतांत्रिक है | सवाल यह उठता है की,जब संसद का शीतकालीन अधिवेशन कुछ ही दिनो में आरंभ होनेवाला था तब इतनी जल्दी में अध्यादेश लाने का औचित्य क्या है? संविधान में अध्यादेश का प्रावधान आपात उपाय के रूप में किया गया है |इसलिए इसका सहारा अपवादात्मक ही लेना चाहीए लेकीन सरकार ने एक के बाद एक अध्यादेशो कि झडी लगा दी गयी है | यह प्रकार जनवादी परंपरा के संकेत और नीतियो का विडंबन और उल्लंघन है | हडबडी में अध्द्यादेश लाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है की वह बाजारकेंद्रित आर्थिक सुधारो के लिए बहुत बैचैन है |यह हकीकत है की बाजारकेंद्रित अर्थव्यवस्था आज पुरे विश्वभर में चरमरा रही है;अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी,युरोजोन का संकट तथा चीन कि अर्थव्यवस्था की सुस्ती  इसका प्रमाण है | भारत की सरकार फीर भी आर्थिक सुधारो के उन्ही मार्गो का अनुसरण कर रही है | इसलिए विकास के  इस पुरे मॉडेल पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है |

 उद्योग के विकास के नाम पर बडे एवं भारी उद्योगो की चर्चा क्यो होती है?उद्योगो के विकास का अर्थ ग्रामीण   उद्योग  का विकास क्यो नही लिया जाता ?जिस विकास मॉडेल में कंपनीयो,निगमो की मुनाफाखोरी के लिए मानव श्रम  का शोषण हो ,जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनो का दोहन हो तथा इससे जुडे परंपरागत किसान,आदिवासी समुदाय को उजाडे,उस विकास के मॉडेल को कैसे स्वीकार किया जा सकता है ?विकास का सही मॉडेल वही है जो मनुष्य समाज एवं  प्रकृती के साथ संगती बैठाते हुए सबका विकास सुनिश्चित करे |इसलिए भारत जैसे श्रमबाहुल्य देश में मास प्रोडक्शन की  बजाय प्रोडक्शन बाई मासेज फॉर द मासेज की नीती ही कारगर हो सकती है |जल,जंगल,जमीन,पहाड आदी प्राकृतिक   धरोहर है,लोगो के जीविका के साधन है,इन्हे बाजार की वस्तू बनाना गलत है |

 युवा भारत इस अध्यादेश का विरोध करता है | जमीन हथियाकर  मेहनतकश जनता को उसके रोजी रोटी के साधनो से,प्राकृतिक जड़ो से बेदखल करने की नीती का विरोध करता है और देशभर में चल रहे संघर्षो का समर्थन करते हुए उन्हे तेज़ करने का संकल्प घोषित करता है |

 2) भारत मे २०११ की जनगणना के अनुसार इस देश मे १६३५ भाषाए होने  की बात कही गयी है | युवा भारत का यह सम्मेलन सभी को ऊनकी मातृभाषा मे न्यूनतम प्रार्थमिक शिक्षा दिए जाने की मांग करता है|

3)भारतीय संविधान की ८ वी अनुसूची मे समावेशीत २२ भाषाओ मे प्रशासनिक एव न्यायालयीन कार्यवाही चलाने की मांग युवा भारत का सम्मेलन करता है |

4) भारत एक बहुभाषायी देश है | भारतीय संविधान  की ८वी अनुसूची मे  २२ भाषाओ को सामील किया गया है| युवा भारत के ६ वे अखिल भारतीय सम्मेलन वर्धा(महाराष्ट्र) ने महाराष्ट्र मे अमरावती जिला के रिधपुर मे मराठी भाषा का केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग की है ,यह सम्मेलन संविधान की ८ वी अनुसूची मे समावेशीत २२ भाषाओ के केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग करता है |इन सभी विश्वविद्यालयो मे साहित्य,कला,विज्ञान,सामाजिक विज्ञान का संशोधन एवं अध्ययन-अध्यापन हो तथा होणेवाले संशोधन एक दुसरी भाषा मे अनुदीत कर उपलब्ध कराने के लिए एक आंतरभारती अनुवाद केंद्र की स्थापना की जाए | 5) झारखंड पर प्रस्ताव

अ) झारखंड प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिती को ४ राज्यो मे विभाजित किया गया है | वहा की वांशिक राष्ट्रीयता के विकास हेतु सही मायने मे झारखंडी लोगो के अस्तित्व एवं अस्मिता को दर्शानेवाले वृहद झारखंड के पुंनर्गाठण की मांग करता है |

ब) झारखंड की तरह भारत के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रो मे कई सारी आदिवासी जनजातीयो को आज   भी शेडुल मे नही रखा गया है | जिसके कारण आदिवासी होते हुए भी उनके मौलिक अधिकारो का हणण होता है |युवा भारत मांग करता है की ऐसी आदिवासी जनजातीयो को शेडुल मे समाविष्ठ किया जाए और उनके  जल,जंगल,जमीन के मौलिक अधिकारो की रक्षा की जाए |     6)फिलिस्तीन की राष्ट्रीयता का समर्थन

     साम्राज्यवादी नीतीयो के तहत फिलिस्तीनी जनता का फिलीस्तींनी राष्ट्र का हक १९४८ से नाकारा गया है | युवा भारत फिलिस्तीन की राष्ट्रीयता के चल रहे संघर्ष का समर्थन करता है |साथ ही साथ विश्व भर मे चल रहे विभिन्न राष्ट्रीयताओ के राष्ट्रमुक्ती संघर्षो का समर्थन करता है|

  7)देशभर मे भगाना(हरियाणा)खरडा(महाराष्ट्र) आदि इलाको मे तथा अन्य इलाको मे दलित,आदिवासी,घुमंतू जनजातीयो के स्त्री-पुरुष और तृतीयपंथीयो तथा अलग-अलग धार्मिक पहचान और मान्यता अपनाने वालो के पर अत्याचारो की घटनाये बढ रही है |

 युवा भारत ऐसी अमानवीय घटनाओ की निंदा करता है और ऐसी घटनाओ को रोकने के लिए समाज जोडो अभियान तेज करणे का संकल्प करता है |

 

भूमी अधिग्रहण अध्यादेश पर प्रस्ताव

युवा भारत संघठन २००५ से जमीन हथियाने कि नीतियो के विरोध में लगातार संघर्ष करते आया है  |जनविरोधी सेझ कानून २००५ के खिलाफ युवा भारत ने महामुंबई शेतकरी (किसान) समिती बनाकर रायगढ (महाराष्ट्र) में निर्णायक लढाई खडी की|पोस्को(उडीसा)सिंगूर,नंदीग्राम,उलुबेरिया (प.बंगाल) में जमीन हथियाने कि साम्राज्यवादी नितीयो के खिलाफ संघर्ष खडा किया | सेझ के माध्यम से जल,जंगल,जमीन हथियाने कि इस प्रक्रिया में इन संघर्शो के परिणामस्वरूप २०१३ में ब्रिटीश हुकमत के जमीन अधिग्रहण कानून १८९४ में व्यापक संशोधन कर जमीन अधिग्रहण के लिए आवश्यक सार्वजनिक हित के प्रावधान को हटा दिया गया | हर प्रकार के निजी एवं सार्वजनिक परीयोजनाओ के लिए जमीन हथियाने को मान्यता देकर केवल मुआवजे व पुनर्वास के दायरे में चर्चा को सिमटा कर रख दिया | २०१३ में बनाये गए इसी उचित मुआवजा का अधिकार,पुनर्स्थापना,पुनर्वास एवं पारदर्शिता भूमी अधिग्रहण विधेयक  २०१३ में  हाल कि  सरकार ने और भी संशोधन एक अध्यादेश द्वारा किये है |

                 अध्यादेश में कहा गया है कि पांच उद्देशो-सुरक्षा,रक्षा,ग्रामीण आधारभूत सरंचना,औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी सामाजिक के निर्माण के लिए अनिवार्य सहमती कि उपधारा और सामाजिक प्रभाव आकलन कि शर्त भूमी अधिग्रहण के लिए आवश्यक नही होगी | अध्यादेश के मुताबिक बहुफसली सिंचीत भूमी भी इन उद्देशो के अधिग्रहित कि जा सकती है |भूमी अधिग्रहण कानून २०१३ देश के अनेक जनसंघठनो द्वारा लढे गये संघर्ष और सर्वोच न्यायालय के कई फैसलो के दबाव कि तार्किक परिणीती था | इस तार्किक परिणीती को महज एक अध्यादेश द्वारा पलट दिया गया है | इस अध्यादेश के तीन आयाम है-एक तो यह की इसमे जमीन मालीको कि सहमती कि शर्त को काफी हद तक काम कर दिया है |दुसरा,ऐसी परियोजनाओ का दायरा काफी हद तक बाधा दिया है,जिसके लिए अधिग्रहण करणे के लिए सहमती कि आवश्यकता हि नही होगी | तीसरा अब बहुफसली जमीन का भी अधिग्रहण किया जा सकेगा| इस अध्यादेश से अत्याधिक अधिग्रहण और जबरन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है |

                    सरकार का यह फैसला पुंजीपतीयो के पक्ष में और किसान एवं गरीबो के खिलाफ तथा अलोकतांत्रिक है | सवाल यह उठता है की,जब संसद का शीतकालीन अधिवेशन कुछ ही दिनो में आरंभ होनेवाला था तब इतनी जल्दी में अध्यादेश लाने का औचित्य क्या है? संविधान में अध्यादेश का प्रावधान आपात उपाय के रूप में किया गया है |इसलिए इसका सहारा अपवादात्मक ही लेना चाहीए लेकीन सरकार ने एक के बाद एक अध्यादेशो कि झडी लगा दी गयी है | यह प्रकार जनवादी परंपरा के संकेत और नीतियो का विडंबन और उल्लंघन है | हडबडी में अध्द्यादेश लाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है की वह बाजारकेंद्रित आर्थिक सुधारो के लिए बहुत बैचैन है |यह हकीकत है की बाजारकेंद्रित अर्थव्यवस्था आज पुरे विश्वभर में चरमरा रही है;अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी,युरोजोन का संकट तथा चीन कि अर्थव्यवस्था की सुस्ती इसका प्रमाण है | भारत की सरकार फीर भी आर्थिक सुधारो के उन्ही मार्गो का अनुसरण कर रही है | इसलिए विकास के इस पुरे मॉडेल पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है |

                       उद्योग के विकास के नाम पर बडे एवं भारी उद्योगो की चर्चा क्यो होती है?उद्योगो के विकास का अर्थ ग्रामीण उद्योग का विकास क्यो नही लिया जाता ?जिस विकास मॉडेल में कंपनीयो,निगमो की मुनाफाखोरी के लिए मानव श्रम का शोषण हो ,जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनो का दोहन हो तथा इससे जुडे परंपरागत किसान,आदिवासी समुदाय को उजाडे,उस विकास के मॉडेल को कैसे स्वीकार किया जा सकता है ?विकास का सही मॉडेल वही है जो मनुष्य समाज एवं प्रकृती के साथ संगती बैठाते हुए सबका विकास सुनिश्चित करे |इसलिए भारत जैसे श्रमबाहुल्य देश में मास प्रोडक्शन की बजाय प्रोडक्शन बाई मासेज फॉर द मासेज की नीती ही कारगर हो सकती है |जल,जंगल,जमीन,पहाड आदी प्राकृतिक धरोहर है,लोगो के जीविका के साधन है,इन्हे बाजार की वस्तू बनाना गलत है | युवा भारत इस अध्यादेश का विरोध करता है | जमीन हथियाकर  मेहनतकश जनता को उसके रोजी रोटी के साधनो से,प्राकृतिक जड़ो से बेदखल करने की नीती का विरोध करता है और देशभर में चल रहे संघर्षो का समर्थन करते हुए उन्हे तेज़ करने का संकल्प घोषित करता है |

                        ( युवा भारत  संघठन के  ७ वे  अखिल भारतीय सम्मेलन  प.बंगाल द्वारा  भूमी                               अधिग्रहण अध्यादेश पर पारित प्रस्ताव)

                                                                                                                  दि.१० मार्च २०१५

                                                                                                                      फुलेश्वर,हावडा

 

युवा भारत के ७ वे अखिल भारतीय संमेलन द्वारा पारित कार्यक्रम प्रस्ताव 

                                             

               १.आज देशभर में धर्म के नाम पर,संप्रदाय के नाम पर जनता के अंदर विरोध पैदा करने की और उनके अंदर एक दुसरे के खिलाफ नफरत फैलाने कि राजनीती तेजी से बढ रही है / इस विभाजन कि राजनीती के विरोध में युवा भारत लगातार प्रचार आंदोलन चलायेगी /

२. भारत के अंदर विभिन्न राष्ट्रीयताए और वांशिक जनजातीया अपना परिचय खो कर अस्तित्वहीन होती जा रही है / इस के खिलाफ इन राष्ट्रीयताओ और जनजातीयो कि तरफसे लढाईया भी खडी हो रही है / युवा भारत राष्ट्रीयताओ और आदिवासीओ के सवाल पर खडी लढाईओ के साथ खडा होगा /

३. युवा भारत लिंग विषमता के खिलाफ लगातार लढाई कर रहा है / जो संघटनाये इस मुद्दे को लेकर लढ रही है, खासकर मेहनतकश महिलाओ को संघटीत करने का काम कर रही है,उनके साथ युवा भारत मोर्चाबंदी खडी करेगा /

४. युवा भारत के ५ वे संमेलन(देवघर) में विकास और पर्यावरण इस विषय पर चर्चा कि गयी थी और पर्यावरण के रक्षण सबंधी आंदोलन खडी करने कि जरुरत व्यक्त कि गयी थी / इसकी धारावाहीकता बनाये रखते हूए युवा भारत पर्यावरण बचाव संघर्ष खडा करने का काम करेगा /

५. युवाओ को एकजूट करने का काम कर रहे है और युवा भारत जैसी मिलीजुली सोच रखनेवाले युवा संघटनाओ के साथ मिलकर काम करने के लिए युवा भारत प्रयासशील रहेगा /

६. शिक्षा आज भगवाकरन और व्यापारीकरण का शिकार हो गयी है /लोकतांत्रिक,वैज्ञानिक,सार्वजनिक और समाजोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था कि मांग को लेकर युवा भारत लगातार संघर्ष करेगा

७. युवा पिढी आज  बेरोजगारी  और छदम मजदूर युनियनो  के शिकंजे में है / काम के घंटे बढते जा रहे है और मजदूरी घटती जा रही है / मजदुरो के लिए काम करने योग्य स्तीथिया और सामाजिक रूप से सुरक्षित वातावरण बुरे तरीके से खत्म किया जा रहा है / इसी तरह  नौकरी दिलाने के नाम पर भ्रष्टाचार तेजी से बढ रहा है / मजदूर आंदोलन  के क्षेत्र में चल रहे  सारे मुद्दो को लेकर  युवा भारत आंदोलन खडा करने का काम करेगी/

८.बहु विकल्पिक समाजोन्मुखी संस्कृती के प्रसार के लिये युवा भारत प्रयासशील रहेगा /

९.समाज में व्यक्तिवाद का विरोध और सामुहीकता के माध्यम से सोचने कि मानसिकता पैदा करणे के लिये युवा भारत काम करेगा/

 

महात्मा गांधी ते कॉम्रेड पानसरे: भारतातील ब्राम्हणी फॅसिझमचा नवा अध्याय

भारत देशातील समस्त मित्र आणि मैत्रीणिंनो ही वेळ बोलण्याची नाही तर लढण्याची आहे.

आज देशात आणीबाणीची परिस्थिती आहे. ‘गुजरात पॅटर्न’ मध्ये पास झालेल्या ‘चलाख’ विद्यार्थ्याने देशाच्या राजकारणाची सूत्रे हाती घेतल्यानंतर आणि महाराष्ट्रात ‘गुजरात पॅटर्न’च्या परीक्षेसाठी बसवलेल्या विद्यार्थ्याने प्राथमिक धडे गिरवायला सुरुवात केल्यानंतर देश व महाराष्ट्राच्या परिवर्तनवादी चळवळीतील कार्यकर्त्यांची आहुती या भांडवली व साम्राज्यवादी विकास धोरणात जाने हे सुनिश्चित झाले आहे. समतेवर आधारीत समाज निर्मितीसाठी मूलभूत भौतिक परिवर्तनाचा ठोस मुद्दा घेऊन वाटचाल करणार्‍या कोणत्याही कार्यकर्त्याला या पुढच्या काळात भारत देशात व विशेषत: ‘पुरोगामी’पणाचे बिरुद मिरवणार्‍या महाराष्ट्रात नैसर्गिक मृत्यू प्राप्त होईल अशी परिस्थिती सध्या दिसत नाही. तेव्हा आज महात्मा गांधींपासून – कॉम्रेड पानसरेंपर्यंत सर्व परिवर्तनवादी शक्तींना व व्यक्तींना आपल्या ‘रडार’ वर घेणार्‍या या ब्राम्हणी  फॅसिझमचा मुकाबला करण्यासाठी एकत्र येणे ही काळाची गरज आहे.

नव्वदच्या नव-उदारमतवादी धोरणांच्या परिणामांनंतर उध्वस्त झालेले देशभरातील भूमिहीन, आदिवासी व शेतकरी संघर्षाचा ठोस पर्याय न मिळाल्यामुळे आत्महत्या करीत आहेत. गेल्या दशकभरात भांडवली विकासाच्या धोरणांनी लादलेल्या आत्महत्यांच्या या सत्रात संघटित व असंघटित क्षेत्रातील बेरोजगार कामगार व सुशिक्षित बेरोजगारांची देखील भर पडली आहे. मात्र या लादलेल्या आत्महत्येचा पर्याय नाकारून आपल्या जाणिवा जागृत व जीवंत ठेवत आणि येणार्‍या प्रत्येक निराशेला बाजूला सारत समतामूलक समाजासाठी संघर्ष करणार्‍या परिवर्तनवादी चळवळीतील कार्यकर्ता हा आजच्या भांडवली विकासापुढील सर्वात मोठा अडथळा ठरत आहे. आत्महत्येचा पर्याय न स्वीकारणार्‍या अशा  कार्यकार्यकर्त्यांची हत्या करण्यासाठी इथल्या ब्रम्हणी व भांडवली सत्ताधार्‍यांनी विडा उचलला आहे. म्हणजे एकतर “तुम्ही स्वत:च गळफास लावून घ्या नाहीतर आम्ही ते काम करतो!” ही त्यांची भूमिका आहे. राजकीय, सामाजिक व माध्यमांच्या दुनियेतील सत्ता – संपत्तीने माजलेले सर्व ‘कुबेर’ आज या भूमिकेचे समर्थन करीत आहेत.

प्रश्नांचे आभाळ डोक्यावर घेऊन फिरणारा विविध पक्ष – संघटनांमधील कृतीशील कार्यकर्ताच इथून पुढच्या आंदोलंनांची दिशा ठरवणार आहे!

२०१३ साली दाभोळकरांच्या हत्येच्यावेळी तथाकथित ‘पुरोगामी’ व ‘धर्मनिरपेक्ष’ आघाडीचे सरकार महाराष्ट्रात व केंद्रात होते तर आज २०१५ साली धर्मांध व  फॅसिस्ट प्रवृत्तीच्या युतीचे सरकार आहे. गुजरात मधील विकासाचा ‘गोध्रा पॅटर्न’ हा ‘बारामतीच्या खोर्‍यातून’ जातो हे महाराष्ट्राची जनता उघड्या डोळ्यांनी बघत आहे. तेव्हा परिवर्तनाची मशाल आपल्या हातात घेतलेल्या आजच्या नव्या पिढीने ती मशाल आपल्याच तेलाने व आपल्याच खांद्यावर तेवत राहील याची काळजी घेतली पाहिजे. बाकी आजच्या सुजाण पिढीला अधिक काही सांगण्याची गरज नाही!!!

ऑगस्ट २०१३ साली पुण्यात झालेल्या दाभोळकरांच्या हत्येनंतर महाराष्ट्रातील विविध संघटनांनी भरवलेल्या ‘निर्धार’ सभा दीर्घकालीन कृतीकार्यक्रमात परावर्तीत होऊ शकलेल्या नाहीत. या सभांमध्ये उपस्थित असलेल्या विविध व्यक्ति व संघटनांचा ढळत जाणारा ‘निर्धार’ महाराष्ट्राने बघितला आहे. कॉम्रेड गोविंद पानसरेंवरील हल्यानंतर पुन्हा त्याच-त्या चुका करून तरुणांच्या ऊर्जेचा असा अपव्यय करणे परिवर्तनवादी चळवळीच्या भवितव्याला परवडणारे नाही. प्रश्नांचे आभाळ डोक्यावर घेऊन फिरणारा विविध पक्ष – संघटनांमधील कृतीशील कार्यकर्ताच इथून पुढच्या आंदोलंनांची दिशा ठरवणार आहे

संपूर्ण देशभर खांदेपालट चालू असताना परिवर्तनवादी चळवळ देखील त्याला अपवाद ठरू शकणार नाही. कॉम्रेड पानसरेंच्या हल्ल्याच्या निषेधात रस्त्यावर आलेल्या नव्या पिढीतिल कार्यकर्त्यांनी एक व्यापक आघाडी उभा करण्याच्या दिशेने गेले पाहिजे.  आपापसातील संवाद व हस्तक्षेपाच्या नव्या जागा शोधत संघर्षरत राहणार्‍या सर्व कार्यकर्त्यांनी भविष्यातील जन आंदोलनांचे नेतृत्व करण्यासाठी तयार राहिले पाहिजे.

भाषणबाजीच्या पलीकडे जाऊन आपला निषेध व्यक्त करण्यासाठी रस्त्यावर उतरलेल्या राज्य व देशातील सर्व कार्यकर्त्यांना व जनसमूहांना ‘युवा भारत’ संघटना आपला पाठिंबा जाहीर करीत आहे.   

युवा भारत – महाराष्ट्                                                                                                                bharatyuva@gmail.com

दयानंद कनकदंडे (नांदेड) ९६३७३०१२०४                                                                                                 संयोजक,अ.भा.समिती

वनराज शिंदे (पुणे) ९९२१४९४६९६, दिपक वाघाडे(नागपूर) ८८०६६७२२७७                                                                     राज्य संयोजक

युवा भारत का 7 वॉं अखिल भारतीय सम्‍मेलन, कोलकाता

युवा भारत का 7 वॉं अखिल भारतीय सम्‍मेलन

       विषय ः”भारत बनने की प्रक्रिया में भाषाई राष्‍ट्रीयता एवं वांशिकता का भविष्‍य’

कार्यक्रम

१.आज देशभर में धर्म के नाम पर,संप्रदाय के नाम पर जनता के अंदर विरोध पैदा करने की और उनके अंदर एक दुसरे के खिलाफ नफरत फैलाने कि राजनीती तेजी से बढ रही है / इस विभाजन कि राजनीती के विरोध में युवा भारत लगातार प्रचार आंदोलन चलायेगी /

२. भारत के अंदर विभिन्न राष्ट्रीयताए और वांशिक जनजातीया अपना परिचय खो कर अस्तित्वहीन होती जा रही है / इस के खिलाफ इन राष्ट्रीयताओ और जनजातीयो कि तरफसे लढाईया भी खडी हो रही है / युवा भारत राष्ट्रीयताओ और आदिवासीओ के सवाल पर खडी लढाईओ के साथ खडा होगा /

३. युवा भारत लिंग विषमता के खिलाफ लगातार लढाई कर रहा है / जो संघटनाये इस मुद्दे को लेकर लढ रही है, खासकर मेहनतकश महिलाओ को संघटीत करने का काम कर रही है,उनके साथ युवा भारत मोर्चाबंदी खडी करेगा /

४. युवा भारत के ५ वे संमेलन(देवघर) में विकास और पर्यावरण इस विषय पर चर्चा कि गयी थी और पर्यावरण के रक्षण सबंधी आंदोलन खडी करने कि जरुरत व्यक्त कि गयी थी / इसकी धारावाहीकता बनाये रखते हूए युवा भारत पर्यावरण बचाव संघर्ष खडा करने का काम करेगा /

५. युवाओ को एकजूट करने का काम कर रहे है और युवा भारत जैसी मिलीजुली सोच रखनेवाले युवा संघटनाओ के साथ मिलकर काम करने के लिए युवा भारत प्रयासशील रहेगा /

६. शिक्षा आज भगवाकरन और व्यापारीकरण का शिकार हो गयी है /लोकतांत्रिक,वैज्ञानिक,सार्वजनिक और समाजोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था कि मांग को लेकर युवा भारत लगातार संघर्ष करेगा

७. युवा पिढी आज  बेरोजगारी  और छदम मजदूर युनियनो  के शिकंजे में है / काम के घंटे बढते जा रहे है और मजदूरी घटती जा रही है / मजदुरो के लिए काम करने योग्य स्तीथिया और सामाजिक रूप से सुरक्षित वातावरण बुरे तरीके से खत्म किया जा रहा है / इसी तरह  नौकरी दिलाने के नाम पर भ्रष्टाचार तेजी से बढ रहा है / मजदूर आंदोलन  के क्षेत्र में चल रहे  सारे मुद्दो को लेकर  युवा भारत आंदोलन खडा करने का काम करेगी/

 ८.बहु विकल्पिक समाजोन्मुखी संस्कृती के प्रसार के लिये युवा भारत प्रयासशील रहेगा /

  ९.समाज में व्यक्तिवाद का विरोध और सामुहीकता के माध्यम से सोचने कि मानसिकता पैदा करणे के लिये युवा भारत काम करेगा/

 

Kolkata sammelan Hindi patrak 8 jan

युवा भारत : कानपुर इकाई के काम और भावी योजनाओं पर रिपोर्ट .

Vijay Chawla
India
युवा भारत : कानपुर इकाई के काम और भावी योजनाओं पर रिपोर्ट .

कानपुर बस्तियो का शहर है. ये बस्तियां शहर की स्थापना से जुडी हुई हैं . शहर की शुरुआत गंगा किनारे वर्ष १७५७ में हुई थी और प्रारंभिक आबादी गंगा किनारे ही बसी थी. आज इस क्षेत्र को पुराना कानपुर कहते हैं. बाद में औद्योगीकरण के दौर में यहाँ तमाम कारखाने लगाए गए .लकिन बस्तित्यों को सुधारने का कोई कार्यक्रम नहीं किया गया. अंग्रेजों ने भारत छोड़त समय एक बहुत ही गन्दा , लकिन आन्दोलनों में सबसे अव्वल , मज़दूर वर्ग और पून्जीपत्री वर्गों के एक बड़े केंद्र, वाले शहर को विरासत के साथ छोड़ा .

१९५० के दशक में प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू एक यात्रा के दौरान कानपुर के मजदूरों की बदतर स्तिथि को दिखकर हैरत में पड़ गए , और फिर उनके आदेश पर सरकार ने श्रमिक कालोनियों का निर्माण शुरू किया.

उसके बाद से भी कई तरह की स्कीमें लाइ गई लेकिन कुछ बातों को छोडकर इन बस्तियों की स्तिथि में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं आया है . इस बीच पिछली बसपा सरकार ने निर्धनों के लिए आवास बनवाने शुरू किये थे . वह योजना आंशिक रूप से ही पूरी हो सकी. सरकार की गिरने के बाद से कई नई योअजनाओं की चर्चा हो रही है लेकिन अभी तक कुछ लागू नहीं हो सका है और समस्त स्तिथि ज्यों की त्यों है . इन सभी स्कीमों में यह एक मंशा रहती है कि महंगी ज़मीन को भू महियाओं को सौंप दी जाय , इसपर बाद में .पहले बस्तियों का सामजि ढाँचा देख ले.

इन बस्तित्यों में सभी जातियों , और अधिकांशत: मेहनतकश वर्ग और कुछ मध्यम वर्ग ही पाया जाता है इन बस्तित्यों में , विशेष रूप से पुराना कानपुर, जहां युवा भारत ने संगठन का निर्माण किया है वहाँ जाति के हिसाब से मकान नहीं बने हुए हैं बल्कि किसी भी जाति का आदमी कही भी मकान बना लेता है . जातिवादी तनाव इन स्थानों में देखने के लिए नहीं मिला है. और यहाँ के निवासियों में एक नैसर्गिक सी वर्गीय सामोहिकता की भावना है. यहाँ सभी प्रकार के कार्य करने वाले लोग मिल जायंगे . मोटर मिस्त्री , कमर्चारी, कारखाना मज़दूर , रसोइया , चतुर्थ्श्रैनी सरकारी कर्मचारी आदि .यहाँ अधिकाँश महिल कार्मे भी कुछ ना कुछ रोज़गार करती हैं, वह चाहए घरों में काम का हो, अथवा सेल्स का , या कोई अन्य.

इसी पुराना कानपुर में हम युवा भारत का काम कानपुर में शुरू किया गया, उसकी प्रधान कारण यह था कि कैलाश् राजभर नामक कार्यकर्ता, जो आज संगठन की कानपुर इकाई के अध्यक्ष हैं , पुराना कानपुर की एक बस्ती में निवास करते थे. कैलाश जी अपने सामाजिक कार्य के दौरान बस्ती के अभी तक हावी एक कंग्रेसी नेता के द्ववारा पैदा की हुई बाधाओं का मुकाबला करते थे . नेता अव्वल रहता था. अधिकाँश बस्तियों में आप पाएंगे कि कुछ दादा लोग बाकी निवासियों को अपने रोआब में रखते हैं .पानी या टट्टी जाने तक के पैसे वसूलते हैं. कुल मिलाकर कैलाश राजभर, अनिल बाबा , राम शंकर र मिश्रा, कुसुम,शरद गुप्ता, सतीश , अरुण इत्यादि प्रारम्भिक साथियों ने इस नेता का मुकाबला किया और एक-दो साल तक कुछ ना कुछ विषय को लेकर कोर्ट कचहरी होतीं रही. लकिन जब हमारा जन कार्य आगे बड़ा, तभी हम नेता को पछाड़ने में सफल हुए.

इस बस्ती ,रानीघाट गोशाला, और सभी अन्य में सबसे अधिक और मूलभूत समस्या मकान निर्माण के लिए ज़मीन का हक मिलने की है .हमारी बुनियाद मांगे यही है कि जहां हम मकान बनाकर लंबे समय से रह रहे है वही ज़मीन हमें आवंटित कर दी जाय . यह मांग बुनियादी है क्योंकि गंगा के किनारे की ज़मीन के दाम बहुत अधिक हो चुके हैं और सभी निर्माण कंपनियों की निगाहें इन सब ज़मीनों पर लगी हुई है . इन भू माफियाओं से संघर्ष हमारा बुनियादी संघर्ष है.अभी तक इस संघर्ष में हम कुछ ही प्रगति कर पाए हैं लेकिन अभी ना जीते हैं और ना ही हारे.इसके अलावा अन्य मांगे जैसे संडास की व्यवस्था और टूटने पर उसका दोबारा निर्माण , पानी की व्यवस्था . रोशनी और आर सी सी की सड़क का निर्माण , इत्यादि कार्य करवाने में हम सफल रहे हैं .

पुराना कानपुर की गंगा किनारे दूसरी बस्ती सर्जूपुर्वा में तो गोशाला के सदस्यों ने ही काम शुरू किया , एक कमेटी का निर्माण किया . कमेटी के सद्स्त्यों नही युवा भारत के मार्ग दर्शन में निरंतर मेहनत करके अपनी कई मांगो को मनवा लिया है .इनकी सड़क टूट जाने से बेहद तकलीफ हो गई थी. निरंतर सामूहिक प्रयासों के बाद अब सड़क बन गई है . इससे साथियों का युवा भारत पर विश्वास बढ़ गया और लगभग तीस से भी अधिक निवासी सदस्य बन गए हैं.

यहाँ पर काम करने का तरीका पूरे तौर पर लोकतान्त्रिक रहा है. सभी निर्णय बैठकों में ही लिए गए हैं. किसी अधिकारी से मिलने के लिए आम तौर पर शिष्ट मण्डल ही गया है. बस्ती समूह के लोग ही गए हैं. इस कार्य में विजय लक्ष्मी , नरेन्द्र ,विमला , दिलीप ने अग्रानी भूमिका निभाई है .इस काम करने की पद्धति से नये साथियों की ट्रेनिंग हो जाती है ,उनका आत्म विश्वास बढ़ता है सामूहिकता में वृधि और उसका महत्व समझ में आता है. एक सामूहिक नेतृत्व का विकास का रास्ता खुल जाता है

. गोशाला और संर्जूपुर्वा मैं निरंतर संघर्ष और भगत सिंह की जन्मतिथी,मज़दूर दिवस और महिला दिवस के तीन कार्यक्रम आयोजित किये हैं जिसमें आम तौर पर ७५-१०० लोगों की उपस्थ्तिती थी . इन आयोजनों और इनमें परचा निकालने से जनता की चेंतना का विकास हुआ है. और युवा भारत को मज़बूत करने में सफलता मिली है.

युवा भारत के काम से आस पास की बस्तियों में भी चर्चा शुरू हो गई है . अब युवा बहारत के साथियों को कई स्थानों से निमंत्रण अ रहे हैं और वाय्सब युवा भारत में भर्ती होना चाहते हैं .इन कामों को अब शुरू किया जाएगा .

गत राष्ट्रीय कार्यकारिणी से साथी लोग उत्साहित लौटे हैं और वापस आकर उन्होनें स्थानीय सम्मेलन की तैयारियां शुरू कर दी है . उसकी तारिख अभी तय नहीं है . वे चाहते हैं कि पहले सम्मलेन हो और अगले दिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो . समाप्त.

प्रस्तुती :कैलाश और सतीश .