रोहीत वेमूल्लाकी आत्महत्या के मायने क्या है ..?

रोहीत वेमूल्लाकी आत्महत्या के मायने क्या है ..?
– दयानंद कनकदंडे

हैद्राबाद केंद्रिय विश्वविद्यालय के शोध छात्र रोहीत वेमूल्ला की
आत्महत्या के बाद देश के कोने-कोने से,चंद्रपूर से मूंबई, पूणे से चेन्नई, हैद्राबाद
से दिल्ली तक एक जनाक्रोश सडको पर उतरा है । नॉन नेट फेलोशिप एवं फंड
कट के विरोध में देशभर के जो कँम्पस आंदोलित दिखे वह सभी कँम्पस रोहीत की
आत्महत्या के मामले को लेकर मौजूदा सरकार के विरोध संगठित होकर
आंदोलनरत है । रोहीत के दलित होने की वजह से एवं मौजूदा सरकार जिस
पार्टी की है,उसका दलितविरोधी चरीत्र देखते हूए यह मूद्दा मोटे तौर दलित
उत्पीडन के तौर पर समाज में अपनी जगह ले रहा है ।
देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानो में नजदिकी समय में छात्रो
द्वारा आत्महत्यांओ की घटनाए सामने आ रही है । संस्थानो के भीतर के जातिवादी
माहौल,फीस में बढौत्तरी,शिक्षा के कर्ज को न चूका पाने से लेकर रोजगार के
क्षेत्र में निर्मित असूरक्षितताओं की वजह से आत्महत्या का रास्ता चूना है । रोहीत
की घटना के कूछ दिनों बाद ही तमिलनाडू के सलेम मेडीकल कॉलेज की छात्रा-
ओं की आत्महत्या का मामला भी सामने आ चूका है। साथ ही जातिवादी माहौल
से त्रस्त छात्रो की आत्महत्याओं के मामलो पर भी रोशनी पडने लगी है ।
रोहीत की आत्महत्या का कारण तणाव (Depression) होने की बात
भी इसी बीच कही जा रही है । जो लोग यह बात कह रहे है वह लोग तनाव को
निर्मित करनेवाले आर्थिक, सामाजिक, राजनीतीक कारणों के उपर से ध्यान हटाना
चाहते है । कोई भी व्यक्ती अपने जीवन में आत्यंतिक बेगानेपण (Alienation)
को महसूस करता है एवं असूरक्षितता को छेदने का रास्ता नही पाता है तो आत्म-
हत्या को आखरी रास्ते के रूप में पाता है । किसी उत्पीडीत आम द्वारा ऐसे
कीए जाने की घटना,बीते दशकभर लाखो किसांनो द्वारा कृषि संकट से नि-
र्मित जीवन के खालीपण को मरने की अर्थपूर्णता से भरने का प्रयास कोई विरोध
का हथियार नही है,बल्की हताशा का सामूहीकता में बदल जाना है । आजकल
बडी संख्या में हो रही छात्र आत्महत्याएं भी इसीकी कडी तो नही । हताशा का
आत्महत्याओं जैसी सामूहीक परिघटना में बदल जाना बेगानेपण,मानवी जीवन में
निर्मित खालीपन को जिम्मेवार व्यवस्था के विरोध में समग्रता लढाई खडी करने
की मॉंग करता है ।
शैक्षणिक संस्थानो में जातिवाद और द्वेष भावनाओं का पूरा वातावरण है,
जिसकी वजह से दलित, आदिवासी, ओबीसी आदी बहूजन तबकों के विद्यार्थीयों
का जीवन मूश्किलो से भर जाता है । इन मूश्किलो के विरोध में लडने के साथ- साथ
अपनी सांस्कृतिक विरासत को आजके भौतिक सवालों के साथ जोडकर उठाने
का चलन आजकल शिक्षा संस्थानो में बढ रहा है । आयआयटी चेन्नई से लेकर
हैद्राबाद की आंबेडकर स्टूडंटस असोसिएशन गतिविधीया इसके प्रमाण कहे
जा सकते है ।
रोहीत एवं उसका संगठन कँम्पस में हो रहे दलित छात्रो के उत्पीडन को
लेकर लगातार आवाजे उठाता रहा है । याकूब मेमन की  फासी को आजीवन कारावास
में बदलने की इस संगठन की मॉंग रही है । देशभर में उठ रहे गोमांस खाने या
न खाने की बहस के बीच यह समूह खाना चूनने की आजादी के पक्ष में रहा है ।
मूजफ्फरनगर दंगा पीडीतो के प्रति अपनी जाहीर संवेदना व्यक्त कर चूका है ।
१६ जनवरी २०१६ को रोहीत द्वारा आत्महत्या करने के १२-१३ दिन पूर्व
रोहीत सहीत ५ दलित छात्रो को यूनिव्हर्सिटी हॉस्टल से राष्ट्रविरोधी गतिविधीयों में
संलिप्त होने का कारण देकर निष्कासित कीया गया था । यह सभी छात्र उस दिन
सें आसमान के नीचे बसेरा करने को मजबूर थे । पिछले कूछ महीनो से रोहीत
आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे । उनको मिलनेवाली फेलोशिप को रोका गया था,जो
१.७५ लाख रूपये थी । इस बीच उन्हे अपनी जीवीका चलाने के लिए ४०,०००
रूपये का कर्जा भी दोस्त की तरफ से लेना पडा था । अपने एवं साथीयों
के उत्पीडन के विरोध में लडनेवाले एवं राष्ट्रविरोधी ठहराए जाने का दंश
झेल रहे रोहीत ने चारो तरफ से असूरक्षितता से घेरे जाने के बीच आत्महत्या
कर ली । अपने द्वारा लिखे गए सूसायडल नोट में जीवन मेें निर्मित रिक्तताओं से
उब जाने की ओर इशारा किया है ।  रोहीत द्वारा मौजूदा सरकार की नीतीयों
के खिलाफ बोलना भाजपा के लिए नागवार गूजरा एवं उसके छात्र संगठन के
नेता से लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा बिछाए गए जाल ने उसकी जान ली.।
रोहीतकी आत्महत्या का एक महत्वपूर्ण पक्ष  दलित उत्पीडन  है और
यह व्यवस्था जो की दलितविरोधी है उसका मूखर विरोध किया जाना चाहीए |
रोहीत याकूब से लेकर मूजफ्फरनगर तक के विषयोपर अपनी राय रखने के
कारण जिस तरह से राष्ट्रविरोधी करार दिया गया है,उस व्यवस्था को उसकी
राष्ट्र की अवधारणा में विभिन्न धर्मीय दलितो,बहूजनो,आदिवासीयों का,किसान मजदूरो
की क्या हैसियत होगी..? यह सवाल भी पूछा जाना चाहीए | अखलाक की हत्या,किसानों
की आत्महत्याओं के लिए जिम्मेवार मौजूदा व्यवस्था दलितविरोधी, किसानविरोधी एवं
मजदूर विरोधी भी है,इसलिए मौजूदा सरकार को सिर्फ दलितविरोधी कहना
सरकार के अपराधोंको कम करने ऑंकने जैसा है |
आज की जो दलित राजनीती है वह मूख्यत: पहचान की राजनीती
तक सीमीत हो गयी है उसे सत्ताधारी जाती-वर्ग द्वारा समरसता की धारा में घोल
लिया गया है | भारत का जो वामपंथ है वह भी अपनी जातीसबंधी भूमिका
को लेकर अपनी अधिकारीक  लाइन में किसी भी तरह का परीवर्तन किए बिना
दलित पहचान की राजनीती करनें मे जूटा हूआ दिखता है,यह एक प्रकार की
वाम समरसता है |   रोहीत दलितों के बीच के नये वर्ग का प्रतिनिधी है | रोहीत की यात्रा अभाविप से एएसए व्हाया एसएफआय रही है| रोहीत की एएसएमार्का दलित राजनीती दक्षिणपंथी समरसता एवं वामपंथी समरसता इस सीमांओ को तोडने का प्रयास था | इसलिए वह याकूब से लेकर मूजफ्फरनगर पर कूछ कहने की कोशिश कर रहा था |
पूर्ववर्ती कॉंग्रेसी सरकार की जनविरोधी की नीतीयों के जवाब में जनता ने मौजूदा सरकार का चूनाव किया है | बीच के समय में सभी जातीयों  से उपजी नयी पीढी जिसे कूछ लोग नये वर्ग के उदय के रूप में चिन्हीत करते हूए नवसर्वहारा कहना
पसंद करते है; ने इसे सत्तासीन करने मे मूख्य भूमिका
निभायी थी | फेलोशिप बंद करने,अपात्र व्यक्तीयों की संस्थानो में नियूक्ती
करने,अभिव्यक्ती की आजादी कूचलने के निर्णय आने के बाद आयआयटी चेन्नई से लेकर हैद्राबाद तक फूटा इस वर्ग का असंतोष अगर मजदूरो, किसानो,महीलाओं,
दलितो की असूरक्षितताओं के साथ मिलकर संगठीत रूप में मौजूदा व्यवस्था
के विरोध में खडा नही होता है तो, यह असंतोष शासकवर्ग की इस या उस
पार्टी की सत्तास्थापना में सहाय्यकारी हो जाएगा |
देशभर में खडे हो रहे छात्र आंदोलन  के दरमियान रोहीत वेमूल्ला
की आत्महत्या ने हमको इन सब चीजों पर सोचने को मजबूर किया है | महाराष्ट्र में शाहीर विलास घोगरे ने १९९७ मे रमाबाई नगर गोलीबारी के बाद आहत होकर आत्महत्या की थी | रोहीत की आत्महत्या का नाता मै उससे जोडना चाहूंगा और यह आशा करना चाहूंगा की,
रोहीत के आत्महत्या के बाद अपने अंदर झॉंके | रोहीत की आत्महत्या से दू:खी होने के बावजूद हमें एकजूट होकर लढना चाहीए एवं आत्महत्या के प्रतिरोध के हथियार
के रूप में बदलने के खिलाफ हमें जूट जाना चाहीए | रोहीत एक कार्यकर्ता
था और मै मानता हूँ की, मैने जिन सवालो की चर्चा करने की कोशिश की है उससे
उसका सरोकार था |

(लेखक छात्र-यूवा संगठन यूवा भारत के अ.भा.समन्वयक है)

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