युवा भारत के ७ वे अखिल भारतीय संमेलन,प.बंगाल द्वारा पारित प्रस्ताव

 1) भूमी अधिग्रहण अध्यादेश पर प्रस्ताव

युवा भारत संघठन २००५ से जमीन हथियाने कि नीतियो के विरोध में लगातार संघर्ष करते आया है  |जनविरोधी सेझ कानून २००५ के खिलाफ युवा भारत ने महामुंबई शेतकरी (किसान) समिती बनाकर रायगढ (महाराष्ट्र) में निर्णायक लढाई खडी की.पोस्को(उडीसा)सिंगूर,नंदीग्राम,उलुबेरिया (प.बंगाल) में जमीन हथियाने कि साम्राज्यवादी नितीयो के खिलाफ संघर्ष खडा किया | सेझ के माध्यम से जल,जंगल,जमीन हथियाने कि इस प्रक्रिया में इन संघर्शो के परिणामस्वरूप २०१३ में ब्रिटीश हुकमत के जमीन अधिग्रहण कानून १८९४ में व्यापक संशोधन कर जमीन अधिग्रहण के लिए आवश्यक सार्वजनिक हित के प्रावधान को हटा दिया गया | हर प्रकार के निजी एवं सार्वजनिक परीयोजनाओ के लिए जमीन हथियाने को मान्यता देकर केवल मुआवजे व पुनर्वास के दायरे में चर्चा को सिमटा कर रख दिया | २०१३ में बनाये गए इसी उचित मुआवजा का अधिकार,पुनर्स्थापना,पुनर्वास एवं पारदर्शिता भूमी अधिग्रहण विधेयक  २०१३ में  हाल कि  सरकार ने और भी संशोधन एक अध्यादेश द्वारा किये है |

    अध्यादेश में कहा गया है कि पांच उद्देशो-सुरक्षा,रक्षा,ग्रामीण आधारभूत सरंचना,औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी सामाजिक के निर्माण के लिए अनिवार्य सहमती कि उपधारा और सामाजिक प्रभाव आकलन कि शर्त भूमी अधिग्रहण के लिए आवश्यक नही होगी | अध्यादेश के मुताबिक बहुफसली सिंचीत भूमी भी इन उद्देशो के अधिग्रहित कि जा सकती है |भूमी अधिग्रहण कानून २०१३ देश के अनेक जनसंघठनो द्वारा लढे गये संघर्ष और सर्वोच न्यायालय के कई फैसलो के दबाव कि तार्किक परिणीती था | इस तार्किक परिणीती को महज एक अध्यादेश द्वारा पलट दिया गया है | इस अध्यादेश के तीन आयाम है-एक तो यह की इसमे जमीन मालीको कि सहमती कि शर्त को काफी हद तक काम कर दिया है |दुसरा,ऐसी परियोजनाओ का दायरा काफी हद तक बाधा दिया है,जिसके लिए अधिग्रहण करणे के लिए सहमती कि आवश्यकता हि नही होगी | तीसरा अब बहुफसली जमीन का भी अधिग्रहण किया जा सकेगा| इस अध्यादेश से अत्याधिक अधिग्रहण और जबरन अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया है |

सरकार का यह फैसला पुंजीपतीयो के पक्ष में और किसान एवं गरीबो के खिलाफ तथा अलोकतांत्रिक है | सवाल यह उठता है की,जब संसद का शीतकालीन अधिवेशन कुछ ही दिनो में आरंभ होनेवाला था तब इतनी जल्दी में अध्यादेश लाने का औचित्य क्या है? संविधान में अध्यादेश का प्रावधान आपात उपाय के रूप में किया गया है |इसलिए इसका सहारा अपवादात्मक ही लेना चाहीए लेकीन सरकार ने एक के बाद एक अध्यादेशो कि झडी लगा दी गयी है | यह प्रकार जनवादी परंपरा के संकेत और नीतियो का विडंबन और उल्लंघन है | हडबडी में अध्द्यादेश लाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है की वह बाजारकेंद्रित आर्थिक सुधारो के लिए बहुत बैचैन है |यह हकीकत है की बाजारकेंद्रित अर्थव्यवस्था आज पुरे विश्वभर में चरमरा रही है;अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी,युरोजोन का संकट तथा चीन कि अर्थव्यवस्था की सुस्ती  इसका प्रमाण है | भारत की सरकार फीर भी आर्थिक सुधारो के उन्ही मार्गो का अनुसरण कर रही है | इसलिए विकास के  इस पुरे मॉडेल पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है |

 उद्योग के विकास के नाम पर बडे एवं भारी उद्योगो की चर्चा क्यो होती है?उद्योगो के विकास का अर्थ ग्रामीण   उद्योग  का विकास क्यो नही लिया जाता ?जिस विकास मॉडेल में कंपनीयो,निगमो की मुनाफाखोरी के लिए मानव श्रम  का शोषण हो ,जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनो का दोहन हो तथा इससे जुडे परंपरागत किसान,आदिवासी समुदाय को उजाडे,उस विकास के मॉडेल को कैसे स्वीकार किया जा सकता है ?विकास का सही मॉडेल वही है जो मनुष्य समाज एवं  प्रकृती के साथ संगती बैठाते हुए सबका विकास सुनिश्चित करे |इसलिए भारत जैसे श्रमबाहुल्य देश में मास प्रोडक्शन की  बजाय प्रोडक्शन बाई मासेज फॉर द मासेज की नीती ही कारगर हो सकती है |जल,जंगल,जमीन,पहाड आदी प्राकृतिक   धरोहर है,लोगो के जीविका के साधन है,इन्हे बाजार की वस्तू बनाना गलत है |

 युवा भारत इस अध्यादेश का विरोध करता है | जमीन हथियाकर  मेहनतकश जनता को उसके रोजी रोटी के साधनो से,प्राकृतिक जड़ो से बेदखल करने की नीती का विरोध करता है और देशभर में चल रहे संघर्षो का समर्थन करते हुए उन्हे तेज़ करने का संकल्प घोषित करता है |

 2) भारत मे २०११ की जनगणना के अनुसार इस देश मे १६३५ भाषाए होने  की बात कही गयी है | युवा भारत का यह सम्मेलन सभी को ऊनकी मातृभाषा मे न्यूनतम प्रार्थमिक शिक्षा दिए जाने की मांग करता है|

3)भारतीय संविधान की ८ वी अनुसूची मे समावेशीत २२ भाषाओ मे प्रशासनिक एव न्यायालयीन कार्यवाही चलाने की मांग युवा भारत का सम्मेलन करता है |

4) भारत एक बहुभाषायी देश है | भारतीय संविधान  की ८वी अनुसूची मे  २२ भाषाओ को सामील किया गया है| युवा भारत के ६ वे अखिल भारतीय सम्मेलन वर्धा(महाराष्ट्र) ने महाराष्ट्र मे अमरावती जिला के रिधपुर मे मराठी भाषा का केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग की है ,यह सम्मेलन संविधान की ८ वी अनुसूची मे समावेशीत २२ भाषाओ के केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग करता है |इन सभी विश्वविद्यालयो मे साहित्य,कला,विज्ञान,सामाजिक विज्ञान का संशोधन एवं अध्ययन-अध्यापन हो तथा होणेवाले संशोधन एक दुसरी भाषा मे अनुदीत कर उपलब्ध कराने के लिए एक आंतरभारती अनुवाद केंद्र की स्थापना की जाए | 5) झारखंड पर प्रस्ताव

अ) झारखंड प्रदेश की भौगोलिक परिस्थिती को ४ राज्यो मे विभाजित किया गया है | वहा की वांशिक राष्ट्रीयता के विकास हेतु सही मायने मे झारखंडी लोगो के अस्तित्व एवं अस्मिता को दर्शानेवाले वृहद झारखंड के पुंनर्गाठण की मांग करता है |

ब) झारखंड की तरह भारत के विभिन्न आदिवासी क्षेत्रो मे कई सारी आदिवासी जनजातीयो को आज   भी शेडुल मे नही रखा गया है | जिसके कारण आदिवासी होते हुए भी उनके मौलिक अधिकारो का हणण होता है |युवा भारत मांग करता है की ऐसी आदिवासी जनजातीयो को शेडुल मे समाविष्ठ किया जाए और उनके  जल,जंगल,जमीन के मौलिक अधिकारो की रक्षा की जाए |     6)फिलिस्तीन की राष्ट्रीयता का समर्थन

     साम्राज्यवादी नीतीयो के तहत फिलिस्तीनी जनता का फिलीस्तींनी राष्ट्र का हक १९४८ से नाकारा गया है | युवा भारत फिलिस्तीन की राष्ट्रीयता के चल रहे संघर्ष का समर्थन करता है |साथ ही साथ विश्व भर मे चल रहे विभिन्न राष्ट्रीयताओ के राष्ट्रमुक्ती संघर्षो का समर्थन करता है|

  7)देशभर मे भगाना(हरियाणा)खरडा(महाराष्ट्र) आदि इलाको मे तथा अन्य इलाको मे दलित,आदिवासी,घुमंतू जनजातीयो के स्त्री-पुरुष और तृतीयपंथीयो तथा अलग-अलग धार्मिक पहचान और मान्यता अपनाने वालो के पर अत्याचारो की घटनाये बढ रही है |

 युवा भारत ऐसी अमानवीय घटनाओ की निंदा करता है और ऐसी घटनाओ को रोकने के लिए समाज जोडो अभियान तेज करणे का संकल्प करता है |

 

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