युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्‍ट्र में संपन्न)

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युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्‍ट्र में संपन्न)

– दयानंद कनकदंडे

साम्राज्यवाद के खिलाफ एवं समतामूलक समाज निर्माण हेतू संघर्षरत युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन दि. 5-6-7 अक्‍तूबर 2012 को नई तालीम समीति परिसर, सेवाग्राम आश्रम, वर्धा (महाराष्‍ट्र) के शांति भवन में दिल्ली मुंबई इंडस्‍ट्रीयल कॉरीडोर, राष्‍ट्रीय जल नीति एवं द्वितीय हरित क्रांती के विरोध में संघर्ष करने की घोषणा के साथ संपन्न हुआं.

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सम्‍मेलन का उद्घाटन महाराष्‍ट्र के वारकरी सम्‍प्रदाय के वरिष्‍ठ किर्तनकार एवं डाऊ केमिकल विरोधी आन्दोलन के नेता ह.भ.प. बंडा तात्‍या कराडकर महारज के द्वारा पौधों को पानी देकर किया गया. युवा भारत के राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन सत्र अनोखे तरीके से किया गया. इस सत्र में युवा भारत की पहलकदमी से चल रहे सर्व धर्मिय सर्व पंथीय समाजिक परिषद की प्रक्रिया से साथीयों को अवगत किया गया. बौद्ध्‍ धम्म से लेकर मध्‍य कालीन सुफी-संत भक्‍ती परंपरा के महाराष्‍ट्र के प्रमुख आधार वारकरी सम्‍प्रदाय, महानुभव पंथ, राष्‍ट्रसंत तुकडोजी महाराज तक भारत के ऐसे सभी समतामूलक धारा, परंपराओं का प्रतिबिंब इस सत्र में दीख रहा था.

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नई तालीम समिती के अध्‍यक्ष डा. सुगन बरंठ जी ने युवा भारत सभी प्रतिनिधीयों का इस ऐतिहासिक वास्तू में स्‍वागत किया और सम्‍मेलन को सफल बनाने के लिए शुभकामनाए दी.

DSC03994 अपने प्रास्ताविक में युवा भारत के राष्‍ट्रीय संयोजक प्रदीप रॉय ने नव-उदारवादी नीतियों को लेकर युवा भारत की भूमिका साथीयों के बीच रखी और विगत 12 वर्षो से चल रहें युवा भारत के साम्राज्यवाद विरोधी संघर्षो की जानाकरी दी.

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सम्मेलन के उद्घाटक ह.भ.प. बंडा तात्या कराडकर महाराज जी ने डाऊ विरोधी आन्दोलन के अनुभव साथीयों के सामने रखे. डाऊ विरोधी संघर्ष से आगे बढकर सेझ विरोधी संघर्ष की भी जानकारी दी. उन्होने कहां की सत्य परेशान हो सकता हैं लेकिन पराभूत नहीं हो सकता. संकट चारो तरफ से आ रहा हैं. पुरा अन्धेरा तो नहीं मिटा सके लेकिन एक दिये की तरह कुछ हद तक अन्धेरा मिटाने की कोशिश युवा भारत के साथीयों को करते रहने का आवाहन बंडा तात्या कराडकर महाराज जी ने किया. अपनी नियोजित व्‍यस्तता के बावजूद इस सत्र में उपस्थित रहें उपाख्‍यायकुलाचार्य प.पू.मा.म. न्यायंबास बाबा महानुभव सामाजिक प्रश्‍नों पर अध्‍यात्मीक शक्‍तीयों ने ठोस भूमिका निभाने की बात पर उन्‍होंने जोर दिया और जल, जंगल, जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ मजबूती के साथ संघर्ष करने का आवाहन किया.

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अमरिकी साम्राज्यवाद द्वारा सद्दाम हुसेन को दी गई फांसी की निषेध करते हुए बौद्ध ध्‍म्म के वरीष्‍ठ भीक्खू भन्ते ज्ञानज्योति जी ने मयांमार, इंडोनेशिया अन्‍य देशों में तथा भारत में आसाम में धर्म के नाम पर चल रहीं हिंसा का कड़ी शब्दों में नींदा की. जल, जंगल, जमीन के दोहन के विरोध में संघर्षरत जनता को आपस में लड़ाने के लिए साम्राज्यवादी ताकतें धर्म का इस्‍तेमाल कर रहीं हैं. इस परिस्थिती में सम्यक एवं समता के पक्ष को माननेवाले धर्म पंथों को संघटीत होकर विषमता के खिलाफ संघर्ष करने का ऐतिहासिक दायित्व निर्वाह करने का आवाहन सभी उपस्थित साथीयों से भन्ते ज्ञानज्योति जी ने किया.

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इस बात को आगे बढाते हुए वरीष्‍ठ मराठी साहित्यकार कवि एवं मुस्लिम मराठी साहित्य सम्मेलन, सांगली (2012) के अध्‍यक्ष प्रो. जावेद पाशा जी ने भारत की सामाजिक वास्‍तविकता – जाति व्यवस्था को एक उत्पादन की व्यसस्था के रुप में विश्‍लेषण करते हुए पसमन्दा मुसलमानों (मुस्लिम ओ.बी.सी.) के सवालों को रखा. नव-उदारवादी नीतियोंने उत्पादक जातियों के रोजगार छीने हैं, आदिवासीयों के जंगल छीने हैं, कृषी का संकट गहरा किया हैं. उसके खिलाफ के संघर्ष में युवा भारत के साथीयों को सजग होकर संघर्ष करने का आवाहन जावेद पाशा जी ने किया.

सेवाग्राम आश्रम के अध्‍यक्ष तथा वरिष्‍ठ गांधीवादी चिंतक आदरणीय मा.म. गडकरी जी ने युवाओं को आशिर्वाद देते हुए कहां कि, महात्मा गांधी जी ने अहिंसा के मार्ग से परिवर्तन किया जा सकता हैं यह पूरे विश्‍व को नया सन्देश दिया हैं. उन्‍होंने कहा कि, देश राजनीतिक रुप से आजाद हुआ लेकिन सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आजादी अभी तक नहीं मिली हैं. इस के लिए समग्र जीवन दर्शन को समझते हुए नई आजादी के लिए संघर्ष करने का आवाहन गडकरी जी ने किया.

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गांधी – विनोबा विचारों के वरिष्‍ठ चिंतक आदरणीय प्रविणाताई देसाई जी ने युवाओं के जोश एवं उत्साह की की प्रशंसा की और युवा भारत की लड़ाईयों को शुभकामानाए दी. राष्‍ट्रसंत तुकडोजी महाराज की रचनाओं का आधार लेते हुए नागपूर के साथी ज्ञानेश्‍वर रक्षक जी ने नव-उदारवादी नीतियों के हिस्से के रुप में आई खुदरा व्‍यापार में विदेशी निवेश की नीती का जमकर विरोध किया.

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उद्घाटन सत्र में युवा भारत के समन्वयक साथी शशी सोनवणे ने 1990 के दशक में पूंजीवादी खेमे की तरफ से लादी गई विचारधारा के अन्त, इतिहास के अन्त तथा सभ्‍यताओं के संघर्ष की संकल्पनाओं को खारीज करते हुए भारत के समतामूलक ऐतिहासिक परंपराओं को जोडने की युवा भारत की कोशिश का समर्थन किया. विगत 10-12 वर्षों से चल रहें महत्वपूर्ण विजयी संघर्षो की बात रखी और पराजित संघर्षो के अन्तर्राष्‍ट्रीय नेता बनकर मॅगसेसे पुरस्‍कार लेने की जो होड़ मची हैं उसकी कठोर नींदा की. इस सत्र का संचालन युवा भारत के महाराष्‍ट्र राज्‍य संयोजक उद्ध्‍व धुमाले ने किया.

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सम्मेलन के दुसरे सत्र ‘नवउदारवादी नीतियों और शिक्षा के सवाल’ पर युवा भारत के राष्‍ट्रीय संयोजक कौशिक हलदर ने कृषी संबंधी, बीज संबंधी पारंपारीक ज्ञान को साम्राज्यवादी नीतियों के हितों के लिए नकारकर एक ही बीज प्रणाली लागू करने के सरकार के कदमों का गलत ठहराया. किसान प्रकृति के झगडते हुए ज्ञपन प्राप्त करता हैं. उसपर पूंजीपतियों की तरफ से कब्जा करने की कोशिश के खिलाफ संघर्ष करते हुए इस पारंपारीक ज्ञान पर समाज का अधिकार पुर्नस्‍थापित करने का अवाहन यु.भा. साथीयों से किया. रामटेक, महाराष्‍ट्र के साथी प्रो. सुरेश सोमकुवर जी ने कहा कि, केन्द्र सरकार द्वारा पारीत शिक्षा अधिकार कानून गरीबों के लिए एक और अमीरों के लिए दुसरी व्यवस्था बनाता हैं. उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि, जो शिक्षा हमें कड़े संघर्ष के बाद प्राप्त होने लगी हैं उसे नव-उदारवादी नीतियां छीन रहीं हैं उसे बचाने के लिए संघर्ष करने का आवाहन किया.

सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए यु.भा. के राष्‍ट्रीय समीति सदस्‍य एवं ‘युवा संवाद’ इस वैचारीक पत्रिका के संपादक साथी डा. ए.के. अरुण जी ने बाजार केन्द्रीत शिक्षा व्यवस्‍था के विरोध में विकल्प में श्रमप्रधान शिक्षा व्यवस्था के रुप में महात्मा गांधी जी की संकल्पना – नई तालीम का विचार आज के संदर्भ में करने की बात कही. पूंजीवादी शिक्षा भोगवादी मुल्यों को पैदा करती हैं. उसके विरोध में श्रम आधारीत शिक्षा व्यवस्‍था स्‍थापित करने की जरुरत पर उन्‍होने जोर दिया. इस सत्र का संचालन साथी प्रो. अनिल जायभाय ने किया.

सम्मेलन के दुसरे दिन की शुरुवात युवा भारत के गीत, ‘राहों पर नीलाम हमारी भूख नहीं हो पाएगी’ इस गीत से और विलास वैरागडे की कविता से किया गई.

पहले सत्र ‘नव-उदारवादी नीतियां और प्राकृतिक संपदा का दोहन’ इस विषय पर युवा भारत का मुख्‍य प्रस्ताव रखा गया. इस विषय पर चर्चा करते हुए महाराष्‍ट्र सर्वोदय मंडल के पुर्व अध्‍यक्ष शंकरराव बगाडे जी ने बात रखते हुए कहा कि, खेती के साथ ही जानवरों की हत्‍या का संकट भी गहराता जा रहा हैं. बडे जानवरों के मांस के निर्यात के लिए यांत्रिकी कत्तलखाने (मेकानाईज्ड स्लॉटर हाऊसेस) के निर्माण इस दिशा में लिया जा रहा कदम हैं. आहार सेवन की विविधता को समझते हुए आहार चयन का मूलभूत अधिकार मानते हुए केवल मुनाफाखोरी के लिए किए जा रहे इस निर्यात को विरोध करने का अवाहन किया गया.

भारत जोडो अभियान के साथी विवेकानंद माथने, गंधमार्धन सुरक्षा समीति, उडि़सा के साथी प्रदीप पुरोहीत, नेचर ह्युमन सेंट्रीक मुवमेंट के साथी सज्जन कुमार जी ने जल, जंगल, जमीन के दोहन के विरोध में चल रहे आन्दोलनों की जानकारी दी और पर्यावरण रक्षा के लिए एक साथ संघर्ष करने पर जोर दिया. यु.भा. के झारखंड राज्‍य के संयोजक अॅड. कृष्‍णा महतो जी ने पानी पर हो रहे साम्राज्यवादी आक्रमण का निषेध किया एवं दामोदर नदी परियोजना के खिलाफ चल रहें युवा भारत के संघर्ष की जानकारी दी.

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युवा भारत के एक संस्थापक साथी विजय चावला नव-उदारवादी नीतियों की सिलसिलेवार ढंग से चर्चा करते हुए इसके खिलाफ लड़ने पर जोर दिया. युवा भारत के संस्‍थापक एवं पुर्व राष्‍ट्रीय समन्वयक अशोक भारत जी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन पर समाज में निर्माण होनेवाली संपत्ती पर सबका समान हक हैं. प्रकृति को नष्‍ट करनेवाले इस विकास नीति का विरोध करते हुए युवा भारत को आनेवाले समय में 20 सदी में हुए समाजवाद के प्रयोगो में हुई गलतीयों से सीखते हुए प्रकृति से तालमेल बनाते हुए वैकल्पिक रचनात्मक करने पर जोर दिया. साथी कौशिक ने द्वितीय हरित क्रांती से कृषी का संकट अधिक गहरा होने की बात रखीं. पहली हरित क्रांति ने जितना नुकसा कृषी और कृषी आधारीत समाजों का किया उससे 4 गुना ज्‍यादा नुकसान इस नई हरित क्रांति से होनवाली हैं. इसलिए युवा भारत के साथीयों को इस के खिलाफ मोर्चा संभल लेने का आवाहन उन्होंने किया.

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सत्र की अध्‍यक्षता कर रहें युवा भारत के संस्थापक, सेझ विरोधी, डाऊ विरोधी आन्दोलन के नेता कॉ. विलास सोनवणे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, सभी नदिया, पर्वत, जंगल बेचे जा रहे हैं उसको बचाने में युवा भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रहीं हैं. जमीन का सवाल साम्राज्यवाद के इस दौर में अधिक जटील हो गया हैं. डा. बाबासाहेब आम्बेडकर जी के नेतृत्व में महाराष्‍ट्र में जमीनदारी विरोधी कानून बने जो आगे चलकर भूमि सुधार कानूनों के आधार बने. भारत के कुछ हिस्‍सों में संघर्ष के कारण और विश्‍व पूंजी की अपनी जरुरत के कारण जमीन किसानों के बीच बटी. आज वही जमीन हथियाने की कोशिशे की सेझ, DMIC के माध्‍यम से की जा रहीं हैं. साम्राज्यवाद के बदले हुए चेहरे को, पूंजी के बदले हुए चरित्र को पिछले 10 वर्षो में जितना समझ पाए उसके आधार पर संघर्ष कर पाए. इसी संदर्भ भारत के ऐतिहासिक भौतिकवाद को लेकर सैद्धांतिक सवाल खडे हुए हैं. इस सवाल के हल का प्रयास समतामूलक अस्मिताओं का प्रतिक के रुप में डाऊ आन्दोलन के बाद सर्व धर्मिय, सर्व पंथीय सामाजिक परिषद के माध्‍यम से किया जा रहां हैं. साम्राज्यावाद के वर्तमान दौर को समझते हुए आगे की लडाई लडने का आवाहन कॉ. विलास सोनवणे जी ने किया. इस सत्र का संचालन यु.भा. के महाराष्‍ट्र संयोजक दयानंद कनकदंडे ने किया.

दुसरे सत्र, ‘नव-उदारवादी नीति और रोजगार के सवाल’ इस विषय पर यु.भा. के महाराष्‍ट्र के संयोजक परमेश्‍वर जाधव, बंगाल के राज्‍य संयोजक प्रसून, यु.भा. के संस्‍थापक सुर्यदेव जी, नागपूर के चिंतक श्री. अनंत अमदाबादकर ने अपनी बात रखी. परमेश्‍वर जाधव ने हरित क्रांति ने गांव के उत्पादक जातियों के रोजगार के छीने जाने की बात कहीं और नव-उदारवादी नीतियों ने यह प्रश्‍न और अधिक गंभीर कर देने की बात कहीं. साथी सुर्यदेव जी ने placement देने के नाम पर कॉलेजों में चल रहें शोषण की जानकारी दी. वक्‍ताओं ने मजदूरों की छटनी, कृषी संकट बेरोजगारी बढानेवाले आदी मुद्दे रखतें हुए नव-उदारवादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने जरुरत पर जोर दिया. इस सत्र की अध्‍यक्षता कर रहें विरेन्द्र क्रांतिकारी ने कहां की सबको रोजगार देनेवाली वैकल्पिक व्यवस्था गांवो में खड़ी करना संभव हैं और इसे साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का हिस्सा के रुप में वैकल्पिक रोजगार की रचना करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आवाहान यु.भा. के साथीयों से किया. इस सत्र का संचालन यु.भा. राष्‍ट्रीय स‍मीति के सदस्‍य किशोर मोरे ने किया.

तीसरा सत्र ‘नव-उदारवादी नीतियां और स्त्री प्रश्‍न’ इस विषय पर हुए. इस सत्र में साथी गीता सिंह (नारी सामर्थ्‍य संगठन, कानपूर), प्रो. नुतर मालवी (सत्‍यशोधक आन्दोलन, वर्धा), नफीसा जी (भारत जोडो अभियान, मुंबर्इ), शोभाताई करांडे (संपादक, संगुणा पत्रिका), सुनीता (सामाजिक कार्यकर्ता, कल्‍याण), तपोति (मजदूर नेता एवं यु.भा. राष्‍ट्रीय समीति सदस्‍य), सरिता भारत (यु.भा. संस्‍थापक एवं शिक्षा कर्मी) सभी वक्‍ताओं ने काम के क्षेत्र में होनेवाले यौन शोषण का निषेध किया. गीता सिंह जी ने कहा कि दंगो में सबसे पहले महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता हैं. नुतन मालवी जी ने जातिगत शोषण में महिलाओं पर बढते अत्‍याचार के ऊपर साथीयों का ध्‍यान आकर्षित किया. साथी सूनीता ने नव-उदारवादी नीतियों के परिणाम स्‍वरुप बढते सेक्स टूरीझम और देह व्यापार को बढावा देनेवाली व्यवस्था का निषेध किया. साथी तपोति जी ने पूंजीवादी व्यवस्था वेश्‍यावृत्ती को सेक्स वर्कर कहकर जो मजदूर का दर्जा देने की कोशिश करता हैं उसका निषेध करते हुए इस पर युवा भारत की भूमिका ऐसे सारे अमानवीय वृत्ती के खिलाफ लढने की रहीं हैं यह स्पष्‍ट किया. सरीता भारत ने कहां कि, युवा भारत महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिका में लाने के लिए चाहे मैदान हो या मंच सब जगह एक अवकाश देता आ रहा हैं. महिला साथीयों ने अपनी जिम्‍मेदारी समझते हुए साम्राज्यावद विरोधी संघर्ष में पहलकदमी लेने का आवाहन किया. सत्र की अध्‍यक्षता कर रहे जयश्री घाडी (संस्‍थापक, यु.भा. एवं मुंबई एयरपोर्ट विराधी तथा उत्तन सेझ विरोधी नेता) ने युवा भारत की पहलकदमी से चले आन्दोलनों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर बात रखी.

सम्मेलन के अंतिम दिन Disability अपंगता के सवाल पर विशेष सत्र रखा गया जिस में साथी पांडूरंग एवं गणपत धुमाले ने अपंगों के सवालों को दया-करुणा के दायरे से बाहर निकालकर अधिकार के स्‍तर पर देखने की जरुरत पर जोर दिया. भूमि सेना आदिवासी एकता परिषद के महाराष्‍ट्र के निमंत्रक साथी राजू पांढरा जी ने साम्राज्यवादी हमले के चलते आदिवासी समुहों के अस्तित्व एवं अस्मिता के सवालों का रखा. ठाणे जिले में चल रहे आदिवासी समुहों के जल, जंगल, जमीन अधिकार के आन्दोलनों से साथीयों को अवगत कराया.

संगठनात्मक सत्र में यु.भा. के राष्‍ट्रीय समन्वयक साथी शशी सोनवणे ने 20 वर्षो से चल रहे नव-उदारवादी नीतियों का विस्‍तार से विश्‍लेषण किया और साम्राज्यवाद के दौर को समझते हुए विगत 10-12 वर्षो से चल रहे यु.भा. के संघर्षो की बात रखी. उन्‍होंने कहा कि युवा भारत ने साम्राज्यवाद के खिलाफ जनता को गोलबंद करने में छोटा ही सही महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. पूंजीवादी खेमे ने जो विचारधारा के अंत, इतिहास के अंत, पूंजीवाद के अंतिम विजय की जो घोषणा दी थी उसे पूंजी के गड में ही सुरंग लग चूकी हैं. ऑकूपाय वॉल स्‍ट्रीट का आन्‍्दोलन नव-उदारवादी नीतियों के सारे सिद्धांतो को ध्‍वस्‍त कर रहा हैं. पुरे विश्‍व में चल रहे संघर्षो ने जिसका एक हिस्‍सा युवा भारत भी हैं, वैकल्पिक समतामूलक समाज स्‍थापित करने की कोशिशों में नई आशाए जगाई हैं. युवा भारत को देश में साम्राज्‍यवाद विरोधी संघर्ष को अधिक तेज करते हुए समतामूलक समाज निर्माण में अधिक संघर्ष करने का आवाहन किया.

सम्‍मेलन में परमाणू नीति, राष्‍ट्रीय जल नीति, द्वितीय हरित क्रांति, शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में, मांस निर्यात एवं यांत्रिकी कत्तलखाने, दिल्ली मुंबई इंडस्‍ट्रीयल कॉरीडोर, तथा साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ प्रस्ताव पारीत किए गए. रायगड, महाराष्‍ट्र में सेझ विरोधी आन्दोलन के नेता अॅड. दत्ता पाटील और आजादी बचाव आन्दोलन के संस्‍थापक नेता बनवारीलाल शर्मा जी का दुःखद देहान्त हुआ. साम्राज्यवाद विरोधी संघर्षो में उनके योगदान को सलाम करते हुए युवा भारत के इस राष्‍ट्रीय सम्मेलन ने शोकप्रस्‍ताव पारीत कर उनके कार्य को और आगे ले चलने का संकल्प किया.

अंतिम सत्र में युवा भारत की नई राष्‍ट्रीय समीति की घोषणा साथी डा. ए.के. अरुण जी ने की. नई राष्‍ट्रीय समीति के चूने गए सदस्‍य इस प्रकार है – डा. ए.के. अरुण (दिल्ली) विरेन्द्र क्रांतिकारी (मोरादाबाद, उ.प्र.), कैलाश जी (कानपूर, उ.प्र.), मिथिलेश (बिलारी, उ.प्र.), रजनीश (बिलारी, उ.प्र.), सरीता भारत (अलवर, राजस्‍थान), नीरज (अलवर, राजस्‍थान), संजय मीणा (दौसा, राजस्‍थान), अॅड. कृष्‍णा महतो (धनबाद, झारखंड), प्रदीप रॉय (हावड़ा, बंगाल), कौशिक हलदर (कोलकाता, बंगाल), प्रसून (बंगाल), इक्बाल गाजी (बंगाल), मनोज दास (बंगाल), विश्‍वजीत पॉल (बंगाल), मुक्‍ता सोनवणे (बेंगलूरु, कर्नाटक), उद्ध्‍व धुमाले (पुणे, महाराष्‍ट्र) परमेश्‍वर जाधव (लातूर, महाराष्‍ट्र), अनिल जायभाय (लातूर, महाराष्‍ट्र), दयानंद कनकदंडे (चंद्रपूर, महाराष्‍ट्र), शशी सोनवणे (विरार, महाराष्‍ट्र).

नवनिर्वाचित राष्‍ट्रीय समीति ने साथी सरीता भारत, विरेन्द्र क्रांतिकारी, कौशिक भारत एवं शशी सोनवणे जी को राष्‍ट्रीय संयोजक घोषित किया और राष्‍ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी साथी शशी सोनवणे को सौंपी गई.

इंकिलाब जिंदाबाद !

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