Yuva Bharat Constitution (Hindi)

Yuva Bharat Constitution Hindi

युवा भारत : कानपुर इकाई के काम और भावी योजनाओं पर रिपोर्ट .

Vijay Chawla
India
युवा भारत : कानपुर इकाई के काम और भावी योजनाओं पर रिपोर्ट .

कानपुर बस्तियो का शहर है. ये बस्तियां शहर की स्थापना से जुडी हुई हैं . शहर की शुरुआत गंगा किनारे वर्ष १७५७ में हुई थी और प्रारंभिक आबादी गंगा किनारे ही बसी थी. आज इस क्षेत्र को पुराना कानपुर कहते हैं. बाद में औद्योगीकरण के दौर में यहाँ तमाम कारखाने लगाए गए .लकिन बस्तित्यों को सुधारने का कोई कार्यक्रम नहीं किया गया. अंग्रेजों ने भारत छोड़त समय एक बहुत ही गन्दा , लकिन आन्दोलनों में सबसे अव्वल , मज़दूर वर्ग और पून्जीपत्री वर्गों के एक बड़े केंद्र, वाले शहर को विरासत के साथ छोड़ा .

१९५० के दशक में प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू एक यात्रा के दौरान कानपुर के मजदूरों की बदतर स्तिथि को दिखकर हैरत में पड़ गए , और फिर उनके आदेश पर सरकार ने श्रमिक कालोनियों का निर्माण शुरू किया.

उसके बाद से भी कई तरह की स्कीमें लाइ गई लेकिन कुछ बातों को छोडकर इन बस्तियों की स्तिथि में कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नहीं आया है . इस बीच पिछली बसपा सरकार ने निर्धनों के लिए आवास बनवाने शुरू किये थे . वह योजना आंशिक रूप से ही पूरी हो सकी. सरकार की गिरने के बाद से कई नई योअजनाओं की चर्चा हो रही है लेकिन अभी तक कुछ लागू नहीं हो सका है और समस्त स्तिथि ज्यों की त्यों है . इन सभी स्कीमों में यह एक मंशा रहती है कि महंगी ज़मीन को भू महियाओं को सौंप दी जाय , इसपर बाद में .पहले बस्तियों का सामजि ढाँचा देख ले.

इन बस्तित्यों में सभी जातियों , और अधिकांशत: मेहनतकश वर्ग और कुछ मध्यम वर्ग ही पाया जाता है इन बस्तित्यों में , विशेष रूप से पुराना कानपुर, जहां युवा भारत ने संगठन का निर्माण किया है वहाँ जाति के हिसाब से मकान नहीं बने हुए हैं बल्कि किसी भी जाति का आदमी कही भी मकान बना लेता है . जातिवादी तनाव इन स्थानों में देखने के लिए नहीं मिला है. और यहाँ के निवासियों में एक नैसर्गिक सी वर्गीय सामोहिकता की भावना है. यहाँ सभी प्रकार के कार्य करने वाले लोग मिल जायंगे . मोटर मिस्त्री , कमर्चारी, कारखाना मज़दूर , रसोइया , चतुर्थ्श्रैनी सरकारी कर्मचारी आदि .यहाँ अधिकाँश महिल कार्मे भी कुछ ना कुछ रोज़गार करती हैं, वह चाहए घरों में काम का हो, अथवा सेल्स का , या कोई अन्य.

इसी पुराना कानपुर में हम युवा भारत का काम कानपुर में शुरू किया गया, उसकी प्रधान कारण यह था कि कैलाश् राजभर नामक कार्यकर्ता, जो आज संगठन की कानपुर इकाई के अध्यक्ष हैं , पुराना कानपुर की एक बस्ती में निवास करते थे. कैलाश जी अपने सामाजिक कार्य के दौरान बस्ती के अभी तक हावी एक कंग्रेसी नेता के द्ववारा पैदा की हुई बाधाओं का मुकाबला करते थे . नेता अव्वल रहता था. अधिकाँश बस्तियों में आप पाएंगे कि कुछ दादा लोग बाकी निवासियों को अपने रोआब में रखते हैं .पानी या टट्टी जाने तक के पैसे वसूलते हैं. कुल मिलाकर कैलाश राजभर, अनिल बाबा , राम शंकर र मिश्रा, कुसुम,शरद गुप्ता, सतीश , अरुण इत्यादि प्रारम्भिक साथियों ने इस नेता का मुकाबला किया और एक-दो साल तक कुछ ना कुछ विषय को लेकर कोर्ट कचहरी होतीं रही. लकिन जब हमारा जन कार्य आगे बड़ा, तभी हम नेता को पछाड़ने में सफल हुए.

इस बस्ती ,रानीघाट गोशाला, और सभी अन्य में सबसे अधिक और मूलभूत समस्या मकान निर्माण के लिए ज़मीन का हक मिलने की है .हमारी बुनियाद मांगे यही है कि जहां हम मकान बनाकर लंबे समय से रह रहे है वही ज़मीन हमें आवंटित कर दी जाय . यह मांग बुनियादी है क्योंकि गंगा के किनारे की ज़मीन के दाम बहुत अधिक हो चुके हैं और सभी निर्माण कंपनियों की निगाहें इन सब ज़मीनों पर लगी हुई है . इन भू माफियाओं से संघर्ष हमारा बुनियादी संघर्ष है.अभी तक इस संघर्ष में हम कुछ ही प्रगति कर पाए हैं लेकिन अभी ना जीते हैं और ना ही हारे.इसके अलावा अन्य मांगे जैसे संडास की व्यवस्था और टूटने पर उसका दोबारा निर्माण , पानी की व्यवस्था . रोशनी और आर सी सी की सड़क का निर्माण , इत्यादि कार्य करवाने में हम सफल रहे हैं .

पुराना कानपुर की गंगा किनारे दूसरी बस्ती सर्जूपुर्वा में तो गोशाला के सदस्यों ने ही काम शुरू किया , एक कमेटी का निर्माण किया . कमेटी के सद्स्त्यों नही युवा भारत के मार्ग दर्शन में निरंतर मेहनत करके अपनी कई मांगो को मनवा लिया है .इनकी सड़क टूट जाने से बेहद तकलीफ हो गई थी. निरंतर सामूहिक प्रयासों के बाद अब सड़क बन गई है . इससे साथियों का युवा भारत पर विश्वास बढ़ गया और लगभग तीस से भी अधिक निवासी सदस्य बन गए हैं.

यहाँ पर काम करने का तरीका पूरे तौर पर लोकतान्त्रिक रहा है. सभी निर्णय बैठकों में ही लिए गए हैं. किसी अधिकारी से मिलने के लिए आम तौर पर शिष्ट मण्डल ही गया है. बस्ती समूह के लोग ही गए हैं. इस कार्य में विजय लक्ष्मी , नरेन्द्र ,विमला , दिलीप ने अग्रानी भूमिका निभाई है .इस काम करने की पद्धति से नये साथियों की ट्रेनिंग हो जाती है ,उनका आत्म विश्वास बढ़ता है सामूहिकता में वृधि और उसका महत्व समझ में आता है. एक सामूहिक नेतृत्व का विकास का रास्ता खुल जाता है

. गोशाला और संर्जूपुर्वा मैं निरंतर संघर्ष और भगत सिंह की जन्मतिथी,मज़दूर दिवस और महिला दिवस के तीन कार्यक्रम आयोजित किये हैं जिसमें आम तौर पर ७५-१०० लोगों की उपस्थ्तिती थी . इन आयोजनों और इनमें परचा निकालने से जनता की चेंतना का विकास हुआ है. और युवा भारत को मज़बूत करने में सफलता मिली है.

युवा भारत के काम से आस पास की बस्तियों में भी चर्चा शुरू हो गई है . अब युवा बहारत के साथियों को कई स्थानों से निमंत्रण अ रहे हैं और वाय्सब युवा भारत में भर्ती होना चाहते हैं .इन कामों को अब शुरू किया जाएगा .

गत राष्ट्रीय कार्यकारिणी से साथी लोग उत्साहित लौटे हैं और वापस आकर उन्होनें स्थानीय सम्मेलन की तैयारियां शुरू कर दी है . उसकी तारिख अभी तय नहीं है . वे चाहते हैं कि पहले सम्मलेन हो और अगले दिन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो . समाप्त.

प्रस्तुती :कैलाश और सतीश .

युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्‍ट्र में संपन्न)

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युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन सेवाग्राम, वर्धा (महाराष्‍ट्र में संपन्न)

- दयानंद कनकदंडे

साम्राज्यवाद के खिलाफ एवं समतामूलक समाज निर्माण हेतू संघर्षरत युवा भारत का 6 ठा राष्‍ट्रीय सम्मेलन दि. 5-6-7 अक्‍तूबर 2012 को नई तालीम समीति परिसर, सेवाग्राम आश्रम, वर्धा (महाराष्‍ट्र) के शांति भवन में दिल्ली मुंबई इंडस्‍ट्रीयल कॉरीडोर, राष्‍ट्रीय जल नीति एवं द्वितीय हरित क्रांती के विरोध में संघर्ष करने की घोषणा के साथ संपन्न हुआं.

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सम्‍मेलन का उद्घाटन महाराष्‍ट्र के वारकरी सम्‍प्रदाय के वरिष्‍ठ किर्तनकार एवं डाऊ केमिकल विरोधी आन्दोलन के नेता ह.भ.प. बंडा तात्‍या कराडकर महारज के द्वारा पौधों को पानी देकर किया गया. युवा भारत के राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन सत्र अनोखे तरीके से किया गया. इस सत्र में युवा भारत की पहलकदमी से चल रहे सर्व धर्मिय सर्व पंथीय समाजिक परिषद की प्रक्रिया से साथीयों को अवगत किया गया. बौद्ध्‍ धम्म से लेकर मध्‍य कालीन सुफी-संत भक्‍ती परंपरा के महाराष्‍ट्र के प्रमुख आधार वारकरी सम्‍प्रदाय, महानुभव पंथ, राष्‍ट्रसंत तुकडोजी महाराज तक भारत के ऐसे सभी समतामूलक धारा, परंपराओं का प्रतिबिंब इस सत्र में दीख रहा था.

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नई तालीम समिती के अध्‍यक्ष डा. सुगन बरंठ जी ने युवा भारत सभी प्रतिनिधीयों का इस ऐतिहासिक वास्तू में स्‍वागत किया और सम्‍मेलन को सफल बनाने के लिए शुभकामनाए दी.

DSC03994 अपने प्रास्ताविक में युवा भारत के राष्‍ट्रीय संयोजक प्रदीप रॉय ने नव-उदारवादी नीतियों को लेकर युवा भारत की भूमिका साथीयों के बीच रखी और विगत 12 वर्षो से चल रहें युवा भारत के साम्राज्यवाद विरोधी संघर्षो की जानाकरी दी.

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सम्मेलन के उद्घाटक ह.भ.प. बंडा तात्या कराडकर महाराज जी ने डाऊ विरोधी आन्दोलन के अनुभव साथीयों के सामने रखे. डाऊ विरोधी संघर्ष से आगे बढकर सेझ विरोधी संघर्ष की भी जानकारी दी. उन्होने कहां की सत्य परेशान हो सकता हैं लेकिन पराभूत नहीं हो सकता. संकट चारो तरफ से आ रहा हैं. पुरा अन्धेरा तो नहीं मिटा सके लेकिन एक दिये की तरह कुछ हद तक अन्धेरा मिटाने की कोशिश युवा भारत के साथीयों को करते रहने का आवाहन बंडा तात्या कराडकर महाराज जी ने किया. अपनी नियोजित व्‍यस्तता के बावजूद इस सत्र में उपस्थित रहें उपाख्‍यायकुलाचार्य प.पू.मा.म. न्यायंबास बाबा महानुभव सामाजिक प्रश्‍नों पर अध्‍यात्मीक शक्‍तीयों ने ठोस भूमिका निभाने की बात पर उन्‍होंने जोर दिया और जल, जंगल, जमीन एवं प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ मजबूती के साथ संघर्ष करने का आवाहन किया.

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अमरिकी साम्राज्यवाद द्वारा सद्दाम हुसेन को दी गई फांसी की निषेध करते हुए बौद्ध ध्‍म्म के वरीष्‍ठ भीक्खू भन्ते ज्ञानज्योति जी ने मयांमार, इंडोनेशिया अन्‍य देशों में तथा भारत में आसाम में धर्म के नाम पर चल रहीं हिंसा का कड़ी शब्दों में नींदा की. जल, जंगल, जमीन के दोहन के विरोध में संघर्षरत जनता को आपस में लड़ाने के लिए साम्राज्यवादी ताकतें धर्म का इस्‍तेमाल कर रहीं हैं. इस परिस्थिती में सम्यक एवं समता के पक्ष को माननेवाले धर्म पंथों को संघटीत होकर विषमता के खिलाफ संघर्ष करने का ऐतिहासिक दायित्व निर्वाह करने का आवाहन सभी उपस्थित साथीयों से भन्ते ज्ञानज्योति जी ने किया.

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इस बात को आगे बढाते हुए वरीष्‍ठ मराठी साहित्यकार कवि एवं मुस्लिम मराठी साहित्य सम्मेलन, सांगली (2012) के अध्‍यक्ष प्रो. जावेद पाशा जी ने भारत की सामाजिक वास्‍तविकता – जाति व्यवस्था को एक उत्पादन की व्यसस्था के रुप में विश्‍लेषण करते हुए पसमन्दा मुसलमानों (मुस्लिम ओ.बी.सी.) के सवालों को रखा. नव-उदारवादी नीतियोंने उत्पादक जातियों के रोजगार छीने हैं, आदिवासीयों के जंगल छीने हैं, कृषी का संकट गहरा किया हैं. उसके खिलाफ के संघर्ष में युवा भारत के साथीयों को सजग होकर संघर्ष करने का आवाहन जावेद पाशा जी ने किया.

सेवाग्राम आश्रम के अध्‍यक्ष तथा वरिष्‍ठ गांधीवादी चिंतक आदरणीय मा.म. गडकरी जी ने युवाओं को आशिर्वाद देते हुए कहां कि, महात्मा गांधी जी ने अहिंसा के मार्ग से परिवर्तन किया जा सकता हैं यह पूरे विश्‍व को नया सन्देश दिया हैं. उन्‍होंने कहा कि, देश राजनीतिक रुप से आजाद हुआ लेकिन सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आजादी अभी तक नहीं मिली हैं. इस के लिए समग्र जीवन दर्शन को समझते हुए नई आजादी के लिए संघर्ष करने का आवाहन गडकरी जी ने किया.

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गांधी – विनोबा विचारों के वरिष्‍ठ चिंतक आदरणीय प्रविणाताई देसाई जी ने युवाओं के जोश एवं उत्साह की की प्रशंसा की और युवा भारत की लड़ाईयों को शुभकामानाए दी. राष्‍ट्रसंत तुकडोजी महाराज की रचनाओं का आधार लेते हुए नागपूर के साथी ज्ञानेश्‍वर रक्षक जी ने नव-उदारवादी नीतियों के हिस्से के रुप में आई खुदरा व्‍यापार में विदेशी निवेश की नीती का जमकर विरोध किया.

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उद्घाटन सत्र में युवा भारत के समन्वयक साथी शशी सोनवणे ने 1990 के दशक में पूंजीवादी खेमे की तरफ से लादी गई विचारधारा के अन्त, इतिहास के अन्त तथा सभ्‍यताओं के संघर्ष की संकल्पनाओं को खारीज करते हुए भारत के समतामूलक ऐतिहासिक परंपराओं को जोडने की युवा भारत की कोशिश का समर्थन किया. विगत 10-12 वर्षों से चल रहें महत्वपूर्ण विजयी संघर्षो की बात रखी और पराजित संघर्षो के अन्तर्राष्‍ट्रीय नेता बनकर मॅगसेसे पुरस्‍कार लेने की जो होड़ मची हैं उसकी कठोर नींदा की. इस सत्र का संचालन युवा भारत के महाराष्‍ट्र राज्‍य संयोजक उद्ध्‍व धुमाले ने किया.

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सम्मेलन के दुसरे सत्र ‘नवउदारवादी नीतियों और शिक्षा के सवाल’ पर युवा भारत के राष्‍ट्रीय संयोजक कौशिक हलदर ने कृषी संबंधी, बीज संबंधी पारंपारीक ज्ञान को साम्राज्यवादी नीतियों के हितों के लिए नकारकर एक ही बीज प्रणाली लागू करने के सरकार के कदमों का गलत ठहराया. किसान प्रकृति के झगडते हुए ज्ञपन प्राप्त करता हैं. उसपर पूंजीपतियों की तरफ से कब्जा करने की कोशिश के खिलाफ संघर्ष करते हुए इस पारंपारीक ज्ञान पर समाज का अधिकार पुर्नस्‍थापित करने का अवाहन यु.भा. साथीयों से किया. रामटेक, महाराष्‍ट्र के साथी प्रो. सुरेश सोमकुवर जी ने कहा कि, केन्द्र सरकार द्वारा पारीत शिक्षा अधिकार कानून गरीबों के लिए एक और अमीरों के लिए दुसरी व्यवस्था बनाता हैं. उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि, जो शिक्षा हमें कड़े संघर्ष के बाद प्राप्त होने लगी हैं उसे नव-उदारवादी नीतियां छीन रहीं हैं उसे बचाने के लिए संघर्ष करने का आवाहन किया.

सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए यु.भा. के राष्‍ट्रीय समीति सदस्‍य एवं ‘युवा संवाद’ इस वैचारीक पत्रिका के संपादक साथी डा. ए.के. अरुण जी ने बाजार केन्द्रीत शिक्षा व्यवस्‍था के विरोध में विकल्प में श्रमप्रधान शिक्षा व्यवस्था के रुप में महात्मा गांधी जी की संकल्पना – नई तालीम का विचार आज के संदर्भ में करने की बात कही. पूंजीवादी शिक्षा भोगवादी मुल्यों को पैदा करती हैं. उसके विरोध में श्रम आधारीत शिक्षा व्यवस्‍था स्‍थापित करने की जरुरत पर उन्‍होने जोर दिया. इस सत्र का संचालन साथी प्रो. अनिल जायभाय ने किया.

सम्मेलन के दुसरे दिन की शुरुवात युवा भारत के गीत, ‘राहों पर नीलाम हमारी भूख नहीं हो पाएगी’ इस गीत से और विलास वैरागडे की कविता से किया गई.

पहले सत्र ‘नव-उदारवादी नीतियां और प्राकृतिक संपदा का दोहन’ इस विषय पर युवा भारत का मुख्‍य प्रस्ताव रखा गया. इस विषय पर चर्चा करते हुए महाराष्‍ट्र सर्वोदय मंडल के पुर्व अध्‍यक्ष शंकरराव बगाडे जी ने बात रखते हुए कहा कि, खेती के साथ ही जानवरों की हत्‍या का संकट भी गहराता जा रहा हैं. बडे जानवरों के मांस के निर्यात के लिए यांत्रिकी कत्तलखाने (मेकानाईज्ड स्लॉटर हाऊसेस) के निर्माण इस दिशा में लिया जा रहा कदम हैं. आहार सेवन की विविधता को समझते हुए आहार चयन का मूलभूत अधिकार मानते हुए केवल मुनाफाखोरी के लिए किए जा रहे इस निर्यात को विरोध करने का अवाहन किया गया.

भारत जोडो अभियान के साथी विवेकानंद माथने, गंधमार्धन सुरक्षा समीति, उडि़सा के साथी प्रदीप पुरोहीत, नेचर ह्युमन सेंट्रीक मुवमेंट के साथी सज्जन कुमार जी ने जल, जंगल, जमीन के दोहन के विरोध में चल रहे आन्दोलनों की जानकारी दी और पर्यावरण रक्षा के लिए एक साथ संघर्ष करने पर जोर दिया. यु.भा. के झारखंड राज्‍य के संयोजक अॅड. कृष्‍णा महतो जी ने पानी पर हो रहे साम्राज्यवादी आक्रमण का निषेध किया एवं दामोदर नदी परियोजना के खिलाफ चल रहें युवा भारत के संघर्ष की जानकारी दी.

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युवा भारत के एक संस्थापक साथी विजय चावला नव-उदारवादी नीतियों की सिलसिलेवार ढंग से चर्चा करते हुए इसके खिलाफ लड़ने पर जोर दिया. युवा भारत के संस्‍थापक एवं पुर्व राष्‍ट्रीय समन्वयक अशोक भारत जी ने कहा कि जल, जंगल, जमीन पर समाज में निर्माण होनेवाली संपत्ती पर सबका समान हक हैं. प्रकृति को नष्‍ट करनेवाले इस विकास नीति का विरोध करते हुए युवा भारत को आनेवाले समय में 20 सदी में हुए समाजवाद के प्रयोगो में हुई गलतीयों से सीखते हुए प्रकृति से तालमेल बनाते हुए वैकल्पिक रचनात्मक करने पर जोर दिया. साथी कौशिक ने द्वितीय हरित क्रांती से कृषी का संकट अधिक गहरा होने की बात रखीं. पहली हरित क्रांति ने जितना नुकसा कृषी और कृषी आधारीत समाजों का किया उससे 4 गुना ज्‍यादा नुकसान इस नई हरित क्रांति से होनवाली हैं. इसलिए युवा भारत के साथीयों को इस के खिलाफ मोर्चा संभल लेने का आवाहन उन्होंने किया.

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सत्र की अध्‍यक्षता कर रहें युवा भारत के संस्थापक, सेझ विरोधी, डाऊ विरोधी आन्दोलन के नेता कॉ. विलास सोनवणे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, सभी नदिया, पर्वत, जंगल बेचे जा रहे हैं उसको बचाने में युवा भारत की भूमिका महत्वपूर्ण रहीं हैं. जमीन का सवाल साम्राज्यवाद के इस दौर में अधिक जटील हो गया हैं. डा. बाबासाहेब आम्बेडकर जी के नेतृत्व में महाराष्‍ट्र में जमीनदारी विरोधी कानून बने जो आगे चलकर भूमि सुधार कानूनों के आधार बने. भारत के कुछ हिस्‍सों में संघर्ष के कारण और विश्‍व पूंजी की अपनी जरुरत के कारण जमीन किसानों के बीच बटी. आज वही जमीन हथियाने की कोशिशे की सेझ, DMIC के माध्‍यम से की जा रहीं हैं. साम्राज्यवाद के बदले हुए चेहरे को, पूंजी के बदले हुए चरित्र को पिछले 10 वर्षो में जितना समझ पाए उसके आधार पर संघर्ष कर पाए. इसी संदर्भ भारत के ऐतिहासिक भौतिकवाद को लेकर सैद्धांतिक सवाल खडे हुए हैं. इस सवाल के हल का प्रयास समतामूलक अस्मिताओं का प्रतिक के रुप में डाऊ आन्दोलन के बाद सर्व धर्मिय, सर्व पंथीय सामाजिक परिषद के माध्‍यम से किया जा रहां हैं. साम्राज्यावाद के वर्तमान दौर को समझते हुए आगे की लडाई लडने का आवाहन कॉ. विलास सोनवणे जी ने किया. इस सत्र का संचालन यु.भा. के महाराष्‍ट्र संयोजक दयानंद कनकदंडे ने किया.

दुसरे सत्र, ‘नव-उदारवादी नीति और रोजगार के सवाल’ इस विषय पर यु.भा. के महाराष्‍ट्र के संयोजक परमेश्‍वर जाधव, बंगाल के राज्‍य संयोजक प्रसून, यु.भा. के संस्‍थापक सुर्यदेव जी, नागपूर के चिंतक श्री. अनंत अमदाबादकर ने अपनी बात रखी. परमेश्‍वर जाधव ने हरित क्रांति ने गांव के उत्पादक जातियों के रोजगार के छीने जाने की बात कहीं और नव-उदारवादी नीतियों ने यह प्रश्‍न और अधिक गंभीर कर देने की बात कहीं. साथी सुर्यदेव जी ने placement देने के नाम पर कॉलेजों में चल रहें शोषण की जानकारी दी. वक्‍ताओं ने मजदूरों की छटनी, कृषी संकट बेरोजगारी बढानेवाले आदी मुद्दे रखतें हुए नव-उदारवादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने जरुरत पर जोर दिया. इस सत्र की अध्‍यक्षता कर रहें विरेन्द्र क्रांतिकारी ने कहां की सबको रोजगार देनेवाली वैकल्पिक व्यवस्था गांवो में खड़ी करना संभव हैं और इसे साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का हिस्सा के रुप में वैकल्पिक रोजगार की रचना करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आवाहान यु.भा. के साथीयों से किया. इस सत्र का संचालन यु.भा. राष्‍ट्रीय स‍मीति के सदस्‍य किशोर मोरे ने किया.

तीसरा सत्र ‘नव-उदारवादी नीतियां और स्त्री प्रश्‍न’ इस विषय पर हुए. इस सत्र में साथी गीता सिंह (नारी सामर्थ्‍य संगठन, कानपूर), प्रो. नुतर मालवी (सत्‍यशोधक आन्दोलन, वर्धा), नफीसा जी (भारत जोडो अभियान, मुंबर्इ), शोभाताई करांडे (संपादक, संगुणा पत्रिका), सुनीता (सामाजिक कार्यकर्ता, कल्‍याण), तपोति (मजदूर नेता एवं यु.भा. राष्‍ट्रीय समीति सदस्‍य), सरिता भारत (यु.भा. संस्‍थापक एवं शिक्षा कर्मी) सभी वक्‍ताओं ने काम के क्षेत्र में होनेवाले यौन शोषण का निषेध किया. गीता सिंह जी ने कहा कि दंगो में सबसे पहले महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता हैं. नुतन मालवी जी ने जातिगत शोषण में महिलाओं पर बढते अत्‍याचार के ऊपर साथीयों का ध्‍यान आकर्षित किया. साथी सूनीता ने नव-उदारवादी नीतियों के परिणाम स्‍वरुप बढते सेक्स टूरीझम और देह व्यापार को बढावा देनेवाली व्यवस्था का निषेध किया. साथी तपोति जी ने पूंजीवादी व्यवस्था वेश्‍यावृत्ती को सेक्स वर्कर कहकर जो मजदूर का दर्जा देने की कोशिश करता हैं उसका निषेध करते हुए इस पर युवा भारत की भूमिका ऐसे सारे अमानवीय वृत्ती के खिलाफ लढने की रहीं हैं यह स्पष्‍ट किया. सरीता भारत ने कहां कि, युवा भारत महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिका में लाने के लिए चाहे मैदान हो या मंच सब जगह एक अवकाश देता आ रहा हैं. महिला साथीयों ने अपनी जिम्‍मेदारी समझते हुए साम्राज्यावद विरोधी संघर्ष में पहलकदमी लेने का आवाहन किया. सत्र की अध्‍यक्षता कर रहे जयश्री घाडी (संस्‍थापक, यु.भा. एवं मुंबई एयरपोर्ट विराधी तथा उत्तन सेझ विरोधी नेता) ने युवा भारत की पहलकदमी से चले आन्दोलनों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर बात रखी.

सम्मेलन के अंतिम दिन Disability अपंगता के सवाल पर विशेष सत्र रखा गया जिस में साथी पांडूरंग एवं गणपत धुमाले ने अपंगों के सवालों को दया-करुणा के दायरे से बाहर निकालकर अधिकार के स्‍तर पर देखने की जरुरत पर जोर दिया. भूमि सेना आदिवासी एकता परिषद के महाराष्‍ट्र के निमंत्रक साथी राजू पांढरा जी ने साम्राज्यवादी हमले के चलते आदिवासी समुहों के अस्तित्व एवं अस्मिता के सवालों का रखा. ठाणे जिले में चल रहे आदिवासी समुहों के जल, जंगल, जमीन अधिकार के आन्दोलनों से साथीयों को अवगत कराया.

संगठनात्मक सत्र में यु.भा. के राष्‍ट्रीय समन्वयक साथी शशी सोनवणे ने 20 वर्षो से चल रहे नव-उदारवादी नीतियों का विस्‍तार से विश्‍लेषण किया और साम्राज्यवाद के दौर को समझते हुए विगत 10-12 वर्षो से चल रहे यु.भा. के संघर्षो की बात रखी. उन्‍होंने कहा कि युवा भारत ने साम्राज्यवाद के खिलाफ जनता को गोलबंद करने में छोटा ही सही महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. पूंजीवादी खेमे ने जो विचारधारा के अंत, इतिहास के अंत, पूंजीवाद के अंतिम विजय की जो घोषणा दी थी उसे पूंजी के गड में ही सुरंग लग चूकी हैं. ऑकूपाय वॉल स्‍ट्रीट का आन्‍्दोलन नव-उदारवादी नीतियों के सारे सिद्धांतो को ध्‍वस्‍त कर रहा हैं. पुरे विश्‍व में चल रहे संघर्षो ने जिसका एक हिस्‍सा युवा भारत भी हैं, वैकल्पिक समतामूलक समाज स्‍थापित करने की कोशिशों में नई आशाए जगाई हैं. युवा भारत को देश में साम्राज्‍यवाद विरोधी संघर्ष को अधिक तेज करते हुए समतामूलक समाज निर्माण में अधिक संघर्ष करने का आवाहन किया.

सम्‍मेलन में परमाणू नीति, राष्‍ट्रीय जल नीति, द्वितीय हरित क्रांति, शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में, मांस निर्यात एवं यांत्रिकी कत्तलखाने, दिल्ली मुंबई इंडस्‍ट्रीयल कॉरीडोर, तथा साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ प्रस्ताव पारीत किए गए. रायगड, महाराष्‍ट्र में सेझ विरोधी आन्दोलन के नेता अॅड. दत्ता पाटील और आजादी बचाव आन्दोलन के संस्‍थापक नेता बनवारीलाल शर्मा जी का दुःखद देहान्त हुआ. साम्राज्यवाद विरोधी संघर्षो में उनके योगदान को सलाम करते हुए युवा भारत के इस राष्‍ट्रीय सम्मेलन ने शोकप्रस्‍ताव पारीत कर उनके कार्य को और आगे ले चलने का संकल्प किया.

अंतिम सत्र में युवा भारत की नई राष्‍ट्रीय समीति की घोषणा साथी डा. ए.के. अरुण जी ने की. नई राष्‍ट्रीय समीति के चूने गए सदस्‍य इस प्रकार है – डा. ए.के. अरुण (दिल्ली) विरेन्द्र क्रांतिकारी (मोरादाबाद, उ.प्र.), कैलाश जी (कानपूर, उ.प्र.), मिथिलेश (बिलारी, उ.प्र.), रजनीश (बिलारी, उ.प्र.), सरीता भारत (अलवर, राजस्‍थान), नीरज (अलवर, राजस्‍थान), संजय मीणा (दौसा, राजस्‍थान), अॅड. कृष्‍णा महतो (धनबाद, झारखंड), प्रदीप रॉय (हावड़ा, बंगाल), कौशिक हलदर (कोलकाता, बंगाल), प्रसून (बंगाल), इक्बाल गाजी (बंगाल), मनोज दास (बंगाल), विश्‍वजीत पॉल (बंगाल), मुक्‍ता सोनवणे (बेंगलूरु, कर्नाटक), उद्ध्‍व धुमाले (पुणे, महाराष्‍ट्र) परमेश्‍वर जाधव (लातूर, महाराष्‍ट्र), अनिल जायभाय (लातूर, महाराष्‍ट्र), दयानंद कनकदंडे (चंद्रपूर, महाराष्‍ट्र), शशी सोनवणे (विरार, महाराष्‍ट्र).

नवनिर्वाचित राष्‍ट्रीय समीति ने साथी सरीता भारत, विरेन्द्र क्रांतिकारी, कौशिक भारत एवं शशी सोनवणे जी को राष्‍ट्रीय संयोजक घोषित किया और राष्‍ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी साथी शशी सोनवणे को सौंपी गई.

इंकिलाब जिंदाबाद !

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रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कारवाई की कड़ी नींदा !

युवा भारत

क्रांतिकारी नौजवानों का अखिल भारतीय संगठन
केन्द्रीय कार्यालय:. A-101, पूनम आस्था, पूनम गार्डन, तिरुपति नगर-2, विरार (प.), जिला. ठाणे, महाराष्ट्र.

 

रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कारवाई की कड़ी नींदा !

युवा भारत रामलीला मैदान, नई दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है. बाबा रामदेव और उनके अनुयायियों के भ्रष्टाचार खिलाफ लड़ रहा है और उन्होंने सरकार से काले धन लाने और दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. हालांकि बाबा और सरकार की वार्ता चल रही थी, सरकारने पुलिस कार्रवाई कर लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश की. पुलिस ने आधी रात को आम लोगों पर, महिला, बच्चों पर लाठीया ऑंसू गैस बरसाए.

भ्रष्‍टाचार विरोधी आन्दोलन के मुद्दे, शैली और आन्दोलनकारीयों के साथ मतभेद हो सकते हैं. सरकार को शांतिपूर्ण, अहिंसक, लोकतांत्रिक आंदोलन को पुलिस दमन से दबाने के बजाय सत्ताधारीयों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए. सत्ता के गलियारों में बड़े पैमाने पर पनपे भ्रष्टाचार से आम जनता तंग आ चुकी हैं. भ्रष्‍टाचार जो इस व्यवस्था का हिस्सा हैं उसके खिलाफ लड़ने के लिए बुनियादी संघर्ष की जरुरत हैं.

  • आम लोग, जो शांति से रामलीला मैदान में इकट्ठे हुए थे उनपर की गई पुलिस कार्रवाई और उसके पिछे के तथाकथित राजनीतिक निर्णय की हम कड़ी नींदा करते हैं ओर उसकी न्यायिक जांच की मांग करते हैं.
  • हम सब से अपील करते है कि विषमता की खाई बढानेवाले नव उदारमतवादी नीतियों की, बड़े पुंजीपतियों को हमारे देश की प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का और मेहनतकश जनता को उपजीविका के साधन से बेदखल करने का मुफ्त लाइसेंस दे दिया है उसके खिलाफ चल रहे संघर्ष को तेज करने का आवाहन करते हैं.

इंकलाब जिंदाबाद!

राष्ट्रीय संयोजक  – शशि सोनवणे, प्रदीप राय, कौशिक हलदार, आचार्य विनोदजी, राजीव राय, हरेंद्र.
एवं युवा भारत की राष्ट्रीय समिति.

9 वे मुस्लिम मराठी साहित्य संमेलन १७ जूनपासून सांगलीत

मुस्लिम मराठी साहित्य संमेलन १७ जूनपासून सांगलीत

by Baswant Vithabai on Monday, May 23, 2011 at 10:47am

मुस्लिम मराठी साहित्य संमेलन १७ जूनपासून सांगलीत

सांगली, २५ फेब्रुवारी/ प्रतिनिधी

मुस्लीम मराठी साहित्य सांस्कृतिक मंडळाच्या वतीने आयोजित राज्यस्तरीय नववे मुस्लीम मराठी साहित्य संमेलन दि. १७ ते १९ जून या कालावधीत सांगली येथे आयोजित करण्यात आल्याची माहिती मुस्लीम मराठी साहित्य सांस्कृतिक मंडळाचे अध्यक्ष डॉ. शेख इक्बाल मिन्ने, कॉ. विलास सोनवणे व गझलकार ए. के. शेख यांनी दिली.

या साहित्य संमेलनाचे स्थळ, स्वागत व संयोजन समिती निवडीसाठी दि. ७ मार्च रोजी मुस्लीम अर्बन को-ऑप सोसायटी सभागृहात बैठक आयोजित करण्यात आली आहे. या साहित्य संमेलनात मुस्लीम साहित्यिकांबरोबरच सर्व पुरोगामी संघटना, विचारवंत, व्यापारी व उपेक्षित वर्ग आदींचा सहभाग राहणार आहे. राज्यातील विविध शहरांत प्रतिवर्षी साहित्य संमेलन आयोजित करून त्या त्या भागातील मुस्लीम समाजातील व्यक्तींना न्याय देण्याचा प्रयत्न केला जात आहे. मुस्लीम समाजाचा इतिहास, सांस्कृतिक देवाण-घेवाण, इतिहासातील योगदान, समस्या व उपेक्षित वर्गाचा विचार या साहित्य संमेलनात प्रामुख्याने मांडला जाणार आहे.

यापूर्वीची साहित्य संमेलने औरंगाबाद, कोल्हापूर, नवी मुंबई व जळगाव आदी शहरांत झाली आहेत. त्या वेळी उस्मानाबाद येथील डॉ. बसारप्पा अहमद, अहमदनगर येथील डॉ. बशीर मुजावर, रायगड येथील प्रा. फातिमा मुजावर व पुणे येथील डॉ. ए. के. शेख या साहित्य संमेलनाच्या अध्यक्षस्थानी होते. यंदाच्या साहित्य संमेलनातील ग्रंथदिंडीत मुस्लीम समाजाचा इतिहास मांडला जाणार आहे. तसेच मुस्लीम समाज संस्कृतीचे मराठी भाषेशी असलेले नातेसंबंध चित्ररथ व देखावा आदींच्या माध्यमातून साकारले जाणार आहे. सांगली जिल्हय़ातील सर्व सामाजिक व सांस्कृतिक मंडळे व संघटना आदींच्या प्रमुख पदाधिकाऱ्यांना या साहित्य संमेलनाच्या स्वागत व संयोजन समितीत घेण्यात येणार असून साहित्यिक, वकील, डॉक्टर, व्यापारी व साहित्यविषयक काम करणाऱ्या संस्थांना सहभागाचे आवाहन करण्यात आले आहे.

या साहित्य संमेलनाच्या नियोजनासाठी युनूस मुलाणी, अ‍ॅड. रियाज जमादार, ए. आय. मुजावर, डॉ. डी. एच. मुल्ला, आसिफ बावा, महंमद वडगावकर, जब्बार तहसीलदार, हनिफ डफेदार, निसार कलाल, रफिक कडलास्कर, प्रशांत पाटील, आयुब मुल्ला व फारूख संगतराज आदी विशेष प्रयत्नशील असल्याचेही डॉ. शेख इक्बाल मिन्न्ो, विलास सोनवणे व ए. के. शेख यांनी सांगितले.

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युवा भारत आन्दोलन गीत (हिन्दी)

Yuva Bharat Hindi Songs युवा भारत आन्दोलन गीत (हिन्दी)

yuva bharat samachar May 2011 issue

may 2011 yuvabharat samachar issue

Strongly condemn the violence unleashed by the authorities on the villagers at Jaitapur.

Press Release by Yuva Bharat

Strongly condemn the violence unleashed by the authorities on the villagers at Jaitapur.

We strongly condemn the brutal violence unleashed by the authorities on the villagers who have been opposing the coming up of 9900 MW Nuclear Power Plant at Jaitapur.

On Monday 18th April, 2011 the police brutally lathi charged and fired on the villagers of Sakhri-Nate. A young 30 year old fisherman Tabrej Abdul Sagvekar (Sayekar) was killed in the firing. This incidence has triggered unrest in the entire district of Ratnagiri which observed total bandh on Tuesday. The situation has become critical that the authorites had to impose curfew in Ratnagiri.

The state govt. is solely responsible for the present situation. It is the state govt. authorities who have made situation provocative. Furthermore, political parties like Shiv Sena under the pretext of opposing the project are trying to politicise the issue.

Right from day one the villagers of Jaitapur, Madban area have been peacefully opposing the coming up of nuclear power project. The agitgation led by Pravin Gavankar, Vaishali Patil, Justice Kolse- Patil and others have been peaceful. The agitators have been rightly pointing out the dangers and futility of such huge nuclear power projects. After Fukushima, Japan’s nuclear catastrophe, it was expected that the Central and State govt. should have put all the proposed nuclear power plants on hold. In Europe, the German and French governments were forced to reconsider the viability of nuclear powers. Unfortunately, our ruling class in order to subserve the intersts of the nuclear lobby is determined to force these projects on the people. For this they can go to any extent even firing its own people.

We demand -

  • The proposed Jaitapur nuclear power project should be scrapped and all construction work at the site should be stopped  with immediate effect.

  • All the arrested villagers should be released and all the cases, legal proceedings against the agitators should be stopped.

  • The concerned officers should be suspended.

  • The Indo-US and the Indo-French Nuclear Deal signed by Manmohan Singh Govt. should be scrapped.

  • Considering the nuclear catastrophe at Fukushima, Japan, instead of nuclear energy alternative non conventional energy sources should be tapped and developed.

  • Finally, unwarranted and unwanted usage of power in the metropolitan cities and other large towns has been observed. Agriculture is sufferering from inadequate and erratic power supply and cities are seen wasting large amount of electricity. We demand that social audit of the distribution of power should be done.

National Convenors

Shashi Sonawane, Pradip Roy, Rajiv Rai, Harendra, Kaushik Bharat and Vinod Bhai.

Yuva Bharat

Stri-Dasya, Jati-Varga Vyavastha Anta Ke Liye Samarpit Naujawanon ka Akhil Bhartiya Sanghatan

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